LIC का आईपीओ बुधवार (4 मई) को खुल जाएगा। 9 मई तक इसमें इनवेस्ट किया जा सकता है। क्या आप इस आईपीओ में लिस्टिंग गेंस (LIC IPO Listing Gains) के लिए इनवेस्ट कर रहे हैं? अगर हां तो आपकी दिलचस्पी यह जानने में होगी कि आपका फटाफट कितना प्रॉफिट बन सकता है। एलआईसी के शेयर 17 मई को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे। उस दिन पता चलेगा कि फटाफट प्रॉफिट के लिए आईपीओ में पैसे लगाने वाले निवेशकों को यह इश्यू खुश करेगा या मायूस।
ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयरों के प्राइस को देखने से अच्छी लिस्टिंग गेंस की उम्मीद दिख रही है। पिछले तीन दिन में ग्रे मार्केट में इस शेयर का प्रीमियम करीब चार गुना हो गया है। अभी ग्रे मार्केट में इस पर प्रति शेयर 90 रुपये का प्रीमियम चल रहा है। यह आईपीओ में तय प्राइस का करीब 10 फीसदी है। अभी इश्यू आने में दो दिन का वक्त बचा है। इन दिनों दिनों में ग्रे मार्केट में प्रीमियम बढ़ने की उम्मीद है।
इश्यू के औपचारिक ऐलान से ठीक पहले बुधवार को इस शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 25 रुपये था। ग्रे मार्केट में ज्यादातर अमीर इनवेस्टर्स और ब्रोकर्स पैसे लगाते हैं। सरकार के एलआईसी की वैल्यूएशन घटाने के बाद उनकी दिलचस्पी इस शेयर में बढ़ी है। डीलरों का कहना है कि बुधवार को आईपीओ खुलने से पहले ग्रे मार्केट में प्रीमियम काफी बढ़ सकता है। आम तौर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम से किसी शेयर की लिस्टिंग प्राइस का संकेत मिलता है।
अगर ग्रे मार्केट में इस शेयर का प्रीमियम बढ़कर 110-120 तक पहुंच जाता है तो इनवेस्टर्स को अच्छी लिस्टिंग गेंस हो सकती है। अगर किसी इनवेस्टर्स को एक लाट यानी 15 शेयर तक एलॉट होते हैं तो उसकी कुल लिस्टिंग गेंस 1800 रुपये (120X15) तक हो सकती है। अगर आप रिटेल इनवेस्टर्स कैटेगरी में इनवेस्ट करते हैं तो आपको प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा। इस तरह आपकी लिस्टिंग गेंस और बढ़ जाएगी।
एक लॉट पर आपका कुल डिस्काउंट 675 रुपये (45X15) रुपये होगा। इसे शामिल करने के बाद आपकी कुल गेंस 2475 रुपये (1800+675) हो जाएगी। अगर आपके पास एलआईसी की पॉलिसी है तो आप पॉलिसीहोल्डर कैटेगरी में अप्लाई कर सकेंगे। इससे आपका कुल गेंस और ज्यादा होगा। इसकी वजह यह है कि पॉलिसीहोल्डर्स को कंपनी प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट दे रही है।
ज्यादातर इनवेस्टर्स LIC के आईपीओ से फटाफट प्रॉफिट कमाना चाहते हैं। नए डीमैट अकाउंट के आंकड़ों से यह संकेत मिलता है। इस साल जनवरी से मार्च के दौरान 90 लाख से ज्यादा डीमैट अकाउंट ओपन हुए हैं। ये आंकड़े एनएसडीएल और सीडीएसएल के हैं। इस साल 31 मार्च तक कुल डीमैट अकाउंट की संख्या बढ़कर 8.97 करोड़ पहुंच गई है। 31 दिसंबर तक देश में कुल डीमैट अकाउंट की संख्या 8.06 करोड़ थी।