LIC IPO: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को LIC IPO के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। कुछ पॉलिसीहोल्डर्स ने IPO के शेयर अलॉटमेंट पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इसमें दखल नहीं दे सकता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, सूर्यकांत और पीएस नरसिम्हा की एक बेंच ने कहा कि कोर्ट कमर्शियल इनवेस्टमेंट और IPO मामले में कोई राहत नहीं दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, "हम अंतरिम राहत नहीं दे सकते हैं।" हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और LIC को एक नोटिस भेजा है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार और कंपनी अगले 8 हफ्तों में याचिकाओं पर अपना जवाब दें।
एक एनजीओ People First ने 11 मई को पॉलिसीहोल्डर्स की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट कर लिया था। पॉलिसीहोल्डर्स की तरफ से इस मामले की पैरवी एडवोकेट श्याम दीवान कर रहे थे। उन्होंने दलील रखी कि सरकार ने जिस तरह मनी बिल लाकर LIC में हिस्सेदारी बेच रही है उस पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि LIC के साथ कई लोगों के अधिकार जुड़े हैं। लिहाजा मनी बिल के जरिए इसमें हिस्सेदारी बेचने का फैसला करना ठीक नहीं है।
इस मामले में इंदिरा जयसिंह ने भी LIC के इश्यू के खिलाफ दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार LIC को बेचना चाहती है तो इसके लिए डी-म्यूचुअलाइजेशन की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।
इस मामले में सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि LIC के IPO पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि नियमों को देखिए और यह जानिए कि इंश्योरेंस बिजनेस के अतिरिक्त फंड का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।