ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर प्रीमियम (GMP) बुधवार को निगेटिव हो गया। यह इस आईपीओ में बोली लगाने वाले इनवेस्टर्स के लिए अच्छी खबर नहीं है। यह इस बात का संकेत हैं कि एलआईसी के शेयर बीएसई और एनएसई में इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हो सकते हैं। इस आईपीओ में प्राइस बैंड 902-949 रुपये था। अनुमान है कि कंपनी इनवेस्टर्स को 949 के कट-ऑफ प्राइस पर शेयर अलॉट करेगी।
एक ट्रेडर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "एक समय ग्रे मार्केट में एलआईसी के शेयर पर प्रीमियम 93-95 रुपये तक पहुंच गया था। उसके बाद से यह लगातार गिरा है। 5 मई को प्रीमियम सिर्फ 8-10 रुपये रह गया था। 6 मई को यह 10 रुपये हो गया था। बुधवार (11 मई) को यह घटकर माइनस 15 पैसे रह गया।"
अगर एलआईसी के शेयरों की लिस्टिंग इश्यू प्राइस से कम पर होती है तो लिस्टिंग गेंस के मकसद से बोली लगाने वाले इनवेस्टर्स को बहुत मायूसी होगी। हालांकि, पॉलिसीहोल्डर्स और रिटेल इनवेस्टर्स को डिस्काउंट मिलने से उन्हें नुकसान होने की उम्मीद नहीं है। उन्हें नुकसान तभी होगा जब उनकी खरीद कीमत से कम पर यह शेयर लिस्ट होगा।
पॉलिसीहोल्डर के लिए एलआईसी के शेयर की खरीद कीमत 889 रुपये थी। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए यह 904 रुपये थी। इस तरह दोनों कैटेगरी के इनवेस्टर्स को लॉस तभी होगा जब एलआईसी का शेयर खरीद कीमत से कम पर लिस्ट होता है। इसकी संभावना कम है। अगर स्टॉक मार्केट में कमजोरी बनी रहती तो 17 मई को लिस्टिंग कमजोर रह सकती है।
सवाल है कि अगर 17 मई को शेयर की लिस्टिंग इश्यू प्राइस से कम पर होती है तो आपके सामने क्या ऑप्शन होगा? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिस्टिंग खराब रहती हो तो भी आपको लॉस में इस शेयर को नहीं बेचना चाहिए। उनका मानना है कि यह इश्यू स्टॉक मार्केट में खराब हालात का शिकार हुआ है। कंपनी की बुनियादी स्थिति मजबूत है। एलआईसी के साथ कई प्लस प्वाइंट्स हैं।
GEPL Capital के एमडी विवेक गुप्ता का कहना है कि अभी मार्केट की जो स्थितियां है, उसका असर एलआईसी के शेयरों पर पड़ सकता है। वह ग्रे मार्केट में इस शेयर के प्रीमिमय में आई कमी से चिंतित नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर लिस्टिंग के दिन शेयर का प्राइस इश्यू प्राइस से नीचे चला जाता है तो इससे इस शेयर का अट्रैक्शन बढ़ जाएगा।
मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने बताया कि इश्यू प्राइस से शेयर की कीमत नीचे जाती है तो इनवेस्टर्स को इस शेयर में इनवेस्टमेंट बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडिया में इंश्योरेंस की पहुंच अभी आबादी के बहुत कम हिस्से तक है। ऐसे में एलआईसी के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। यह मार्केट लीडर है। इसका डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क जबर्दस्त है। इसका फायदा इसे मिलना तय है।