Macleods Pharmaceuticals ने आईपीओ पेश करने का प्लान टाल दिया है। यह फार्मा सेक्टर के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता था। मैकलियोड फार्मास्युटिकल्स मुंबई की फार्मा कंपनी है। वैल्यूएशन को लेकर इनवेस्टर्स से बातचीत के बाद कंपनी ने आईपीओ टालने का फैसला लिया है।
स्टॉक मार्केट में हालात चैलेंजिंग बने हुए हैं। इसका असर बड़ी कंपनियों के आईपीओ प्लान पर पड़ा है। हालांकि, कई छोटी कंपनियों के आईपीओ पिछले कुछ हफ्तों में आए हैं। इससे पहले मई से अगस्त के मध्य तक आईपीओ मार्केट में सुस्ती रही।
मैकलियोड फार्मा के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होता। इसका मतलब यह है कि कंपनी के प्रमोटर इस आईपीओ के तहत अपनी हिस्सेदारी (शेयर) बेचने वाले थे। यह आईपीओ करीब 5000 करोड़ रुपये का हो सकता था।
एक सूत्र ने बताया, "मैकलियोड फार्मास्युटिकल्स ने कुछ महीनों के लिए अपना आईपीओ टाल दिया है। फरवरी में सेबी को पेपर फाइल करने के दौरान कंपनी ने अपनी वैल्यूएशन 50,000 करोड़ रुपये लगाई थी। उसने रेगुलेटर की मंजूरी भी हासिल कर ली थी। लेकिन, बाद में वैल्यूएशन इससे कम लगाई गई।"
एक दूसरे सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया कि मैकलियोड फार्मास्युटिकल्स ने आईपीओ का प्लान टालने के बाद कुछ प्राइवेट इक्विटी फंडों से शुरुआती बातचीत की है। इनमें क्रिसकैपिटल भी शामिल था, जो ज्यादातर फार्मा कंपनियों में निवेश करता है। इस बातचीत में आईपीओ की जगह प्राइवेट इनवेस्टमेंट के जरिए करीब 10 करोड़ डॉलर जुटाने के बारे में चर्चा हुई थी।
सूत्र ने बताया कि पीई फंडों से बातचीत के बावजूद अभी इस बारे में अंतिम फैसला नहीं हुआ है कि कंपनी का प्रमोटर ग्रुप पीई फंडों से पैसे जुटाएगा या नहीं। सूत्र ने बताया कि मैकलियोड फार्मा कैश-रिच कंपनी है। इस पर कोई कर्ज नहीं है। इसका डोमेस्टिक बिजनेस काफी ठोस है। इस साइज और स्केल के फार्मा बिजनेस बहुत कम हैं। इसलिए इस कंपनी में पीई फंडों की दिलचस्पी को लेकर कोई आश्चर्य नहीं है।
कंपनी के DRHP की वैलिडिटी मई 2023 तक है। इसलिए कंपनी के पास मार्केट का माहौल बदलने का इंतजार करने के लिए काफी टाइम है। इस बारे में मैकलियोड फार्मा और क्रिसकैपिटल को भेजे गए ईमेल के जवाब नहीं मिले।