मुंबई मुख्यालय वाली मैकलियोड्स फार्मास्युटिकल्स (Macleods Pharmaceuticals) ने अपना इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लाने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट पेपर जमा किए हैं। अगर सेबी से Macleods Pharma के आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह देश के सबसे बड़े फार्मा आईपीओ में से एक हो सकता है।
ग्लैंड फार्मा (Gland Pharma) नवंबर 2020 में 6,480 करोड़ रुपये का IPO लाई थी, जो भारत में किसी भी फार्मा कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। वहीं पिछले साल अगस्त में बैन कैपिटल के निवेश वाली एमक्योर फार्मा (Emcure Pharma) ने 4,500 से 5,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने के ड्राफ्ट पेपर जमा किया है।
मैकलियोड्स फार्मा, दवाओं को बनाने में कच्चे माल के तौर पर प्रयोग होने वाले API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स) और फिनिश्ड डोज फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स को विकसित करने और उनका उत्पादन करने में माहिर है। आईपीओ प्रस्ताव के मुताबिक Macleods Pharma का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब यह है कि कंपनी इसके तहत कोई नए शेयर नहीं जारी करेगी, बल्कि कंपनी के प्रमोटर और शेयरहोल्डर्स अपने शेयरों को बिक्री के लिए लोगों के सामने रखेंगे।
Macleods Pharma के वैल्यूएशन को लेकर अभी मंथन जारी है और इसके बाद ही आईपीओ के फाइनल साइज का ऐलान किया जाएगा। ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत प्रमोटरों और शेयरहोल्डरों की तरफ से 60,482,040 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा।
इस आईपीओ के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, ICICI सिक्योरिटीज, सिटी, नोमुरा और एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज को इनवेस्टमेंट बैंकर के रूप में चुना गया है। वहीं सिरिल अमरचंद मंगलदास और शार्दुल अमरचंद मंगलदास को लीगल एडवाइज के तौर पर नियुक्त किया गया है।
Macleods Pharma पर एक नजर
डॉ राजेंद्र अग्रवाल ने अपने भाइयों गिरधारी लाल बावरी और बंदवारी लाल बावरी के साथ मिलकर 1986 में Macleods फार्मास्युटिकल्स की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य टीबी बीमारी के इलाज से जुड़ी दवाओं का उत्पादन करना था।
आज यह कंपनी भारतीय बाजार में बिक्री के आधार पर देश की 7वीं सबसे बड़ी कंपनी है। यह कंपनी एंटी-इन्फेक्टिव, कार्डियोवस्कुलर, एंटी-डायबिटिक, स्किन डीजीज और हार्मोन ट्रीटमेंट सहित कई प्रमुख चिकित्सीय क्षेत्रों में दवाओं के विकास, उत्पादन और मार्केटिंग में लगी हुई है। वित्त वर्ष 2021 में कंपनी का रेवेन्यू 7,199 करोड़ रुपये रहा, जिसमें से 2,096 करोड़ रुपये उसका EBITDA रहा।