नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। इस दिशा में अगले सप्ताह गुड न्यूज मिल सकती है। ऐसी खबर है कि एक्सचेंज 15 या 16 जून को कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास IPO के लिए ड्राफ्ट जमा कर सकता है। यह बात न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कही गई है। NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्लान को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी जनवरी में सेबी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद दी गई।
कहा जा रहा है कि NSE IPO में केवल ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो IPO से हासिल पूरा पैसा शेयर बिक्री करने वालों के पास जाएगा। OFS में टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई., LIC, SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शेयर बेच सकते हैं। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।
NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी अच्छी खासी हिस्सेदारी है।
IPO का साइज 2.5 अरब डॉलर (लगभग 23,085 करोड़ रुपये) रहने का अनुमान है। NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।
पहली बार दिसंबर 2016 में किया था अप्लाई
NSE की लिस्टिंग लगभग एक दशक से कई नियामकीय कारणों, विशेष रूप से को-लोकेशन विवाद के चलते अटकी हुई थी। NSE ने दिसंबर 2016 में पहली बार अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। लेकिन SEBI ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी। NSE को-लोकेशन केस में आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के सिस्टम तक विशेष रूप से पहुंच दी गई। लंबे कानूनी विवाद के बाद NSE ने 2025 में ₹1,388 करोड़ का भुगतान कर सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा था।
बाद में SEBI ने को-लोकेशन केस में NSE की ओर से दाखिल सेटलमेंट याचिका को इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी और IPO की राह का एक रोड़ा दूर हुआ। अनलिस्टेड बाजार में NSE की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।