NSE IPO: एनएसई के शेयरों पर लगातार घट रहा जीएमपी, आईपीओ में बोली लगाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

NSE IPO: अनऑफिशियल मार्केट एक्टिविटी ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एनएसई के शेयर के GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट देखने को मिली है। अब शेयर पर जीएमपी घटकर करीब 10-11 फीसदी पर आ गया है। इनवेस्टरगेंस के मुताबिक, शेयर का जीएमपी 179 रुपये था, जो 10.03 लिस्टिंग गेंस का संकेत देता है

अपडेटेड Sep 15, 2026 पर 5:17 PM
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यह आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। इसमें 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है।

NSE IPO: एनएसई के आईपीओ के खुलने में अब सिर्फ एक दिन बाकी रह गया है। इस बीच शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम लगातार घट रहा है। यह आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। इसमें 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। शेयर की लिस्टिंग 24 सितंबर को होगी। इनवेस्टर्स को लंबे समय से इस आईपीओ का इंतजार रहा है।

शेयरों पर जीएमपी में लगातार गिरावट 

अनऑफिशियल मार्केट एक्टिविटी ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एनएसई के शेयर के GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट देखने को मिली है। अब शेयर पर जीएमपी घटकर करीब 10-11 फीसदी पर आ गया है। इनवेस्टरगेंस के मुताबिक, शेयर का जीएमपी 179 रुपये था, जो 10.03 लिस्टिंग गेंस का संकेत देता है। आईपीओ वॉच के मुताबिक, जीएमपी से शेयर पर 11.65 फीसदी लिस्टिंग गेंस का संकेत मिलता है। एक दिन पहले शेयर का जीएमपी 12 फीसदी से ज्यादा था।


डेरिवेटिव्स पर निर्भरता बड़ा रिस्क

जीएमपी में कमी के बीच एनालिस्ट्स का कहना है कि एनएसई की काफी निर्भरता डेरिवेटिव्स पर है, जो इसके लिए बड़ा रिस्क है। एनएसई के रेवेन्यू में ऑप्शंस ट्रांजेक्श फीस की बड़ी हिस्सेदारी है। पॉल मैनेजमेंट में रिसर्च हेड प्रसेनजीत पॉल ने कहा कि एनएसई का बिजनेस स्ट्रॉन्ग है। एक्सचेंज प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज से काफी आगे है।

शेयर महंगा नहीं तो सस्ता भी नहीं

उन्होंने कहा, "प्राइस बैंड के 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर वैल्यूएशन FY26 की अर्निंग्स का करीब 43 गुना है। यह वाजिब है, लेकिन इसे कम नहीं कहा जा सकता। आगे एक्सचेंज की ग्रोथ कैपिटल मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ने, कैश-मार्केट एक्टिविटी, नए प्रोडक्ट्स, डेटा, सूचकांकों और गिफ्ट सिटी पर निर्भर करेगा। सिर्फ मार्केट शेयर बढ़ने से काम नहीं चलेगा।"

अर्निंग्स ग्रोथ, कैश मार्केट वॉल्यूम पर रखनी होगी नजर

उन्होंने कहा, "डेरिवेटिव्स पर निर्भरता एक्सचेंज के लिए बड़ा रिस्क है। रेवेन्यू में ऑप्शन ट्रांजेक्शंस फीस का बड़ा योगदान है। लिस्टिंग के बाद इनवेस्टर्स को अर्निंग्स ग्रोथ, कैश मार्केट वॉल्यूम, ऑप्शंस एक्टिविटी और प्रॉफिटबिलिटी पर नजर रखनी होगी।" इनवेस्टर्स पर एनएसई के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान के बयान का भी असर पड़ा है।

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बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर 

NSE का मानना है कि यूपीआई से 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का ट्रॉजेक्शन वॉल्यूम पर थोड़ समय तक असर पड़ेगा। लेकिन, बाद सब सामान्य हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। इसका मतलब है कि इस इश्यू में कई पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेच रहे हैं। हालांकि, यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर है। बाजार पर करीब बीते डेढ़ महीनों से दबाव दिख रहा है।

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