IPO : प्राइमरी मार्केट में आमतौर पर चुनाव से पहले सुस्ती देखी जाती है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ऐसे कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे ऐसा लगता है कि निवेशक और कंपनियां इस साल चुनाव के नतीजे को लेकर अधिक आश्वस्त हैं। प्राइमरी मार्केट ट्रैकर प्राइम डेटाबेस के डेटा से पता चलता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यानी अक्टूबर से फरवरी की अवधि में 39 कंपनियों ने अपना आईपीओ लॉन्च किया है। इन कंपनियों ने कुल मिलाकर रिकॉर्ड 33,253.07 करोड़ रुपये के जुटाए हैं।
IPO के जरिए कंपनियों ने जुटाए रिकॉर्ड फंड
दिलचस्प बात यह है कि 2004, 2009, 2014 और 2019 के पिछले चार चुनावों से पहले छह महीने की अवधि (अक्टूबर से मार्च) में कुल 20 कंपनियों ने ही अपना आईपीओ लॉन्च किया। इन कंपनियों द्वारा कुल 4,308 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसका मतलब है कि कंपनियों द्वारा जुटाई गई राशि पिछले 4 वर्षों के मुकाबले अकेले इस साल से सात गुना से अधिक है।
मार्च में अब तक 1,548.75 करोड़ रुपये के चार नए इश्यू लॉन्च हुए हैं और आईपीओ मार्केट में मोमेंटम बना हुआ है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में गिरावट देखी गई। लेकिन इसके बावजूज प्राइमरी मार्केट में एक्टिविटी आने वाले महीनों में मतदान अवधि तक अच्छी तरह से जारी रहने की उम्मीद है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय
प्राइम डेटाबेस ग्रुप के MD प्रणव हल्दिया ने कहा, "अप्रैल और मई में भी और अधिक इश्यू लॉन्च होने की संभावना है।" एक्सपर्ट्स ने कहा कि निवेशक और कंपनियां इस साल चुनाव के नतीजों को लेकर अधिक आश्वस्त हैं, जिससे प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों मार्केट्स में मजबूत पॉजिटिव सेंटीमेंट बनी हुई है। हल्दिया ने कहा कि इस बार चुनाव नतीजों पर व्यापक सहमति बनती दिख रही है और राजनीतिक स्थिरता से मार्केट सेंटीमेंट को बढ़ावा मिल रहा है।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दोबारा चुने जाने को लेकर भरोसा और उसके चलते आर्थिक नीतियों और इन्फ्रॉस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निरंतरता से मार्केट सेंटीमेंट को बढ़ावा मिल रहा है।