5,000 करोड़ रुपये के IPOs को मिली मंजूरी इस महीने हो जाएगी खत्म, जानिए कंपनियां क्यों नहीं ला रहीं पब्लिक ऑफर

इस महीने कुल चार कंपनियों के इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) को मिली मंजूरी खत्म होने वाली है, जिनकी कुल वैल्यू करीब 5,000 करोड़ रुपये है

अपडेटेड Oct 06, 2022 पर 11:38 PM
SEBI ने इन कंपनियों को अक्टूबर 2021 में आईपीओ लाने की मंजूरी दी थी

इस महीने कुल चार कंपनियों के इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) को मिली मंजूरी खत्म होने वाली है, जिनकी कुल वैल्यू करीब 5,000 करोड़ रुपये है। इन कंपनियों में वन मोबिक्विक सिस्टम्स (One Mobikwik Systems), स्कैनरे टेक्नोलॉजीज (Skanray Technologies), पेन्ना सीमेंट इंडस्ट्रीज (Penna Cement Industries) और ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक (ESAF Small Finance Bank) शामिल है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इन कंपनियों को अक्टूबर 2021 में आईपीओ लाने की मंजूरी दी थी।

SEBI के नियमों के मुताबिक, कंपनियों को मार्केट रेगुलेटर से मंजूरी मिलने के एक साल के अंदर अपने IPO को लॉन्च करना होता है। अगर वह ऐसा करने में विफल रहती है, तो उनकी मंजूरी खत्म हो जाती है और उन्हें फिर नए सिरे से आईपीओ के लिए आवेदन करना पड़ता है। चूंकि इन चारों कंपनियों के IPO आवेदन को पिछले साल अक्टूबर में मंजूरी दी गई थी, ऐसे में इस महीने उनकी मंजूरी एक्सपायर हो रही है।

One Mobikwik Systems ने पिछले साल सेबी के पास IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे और कंपनी ने करीब 1,900 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। हालांकि बाजार में उतारचढ़ाव की स्थिति को देखते हुए कंपनी IPO लॉन्च करने में देरी कर रही है। Mobikwik की प्रतिद्वंदी कंपनी पेटीएम की लिस्टिंग भी पिछले साल निराशाजनक रही थी।


यह भी पढ़ें- Multibagger: इस शेयर ने ₹1 लाख को बना दिए 10 करोड़ रुपये, ICICI सिक्योरिटीज ने दी है खरीदने की सलाह

स्कैनरे टेक ने अपने IPO से करीब 500 करोड़ रुपये, पेना सीमेंट ने लगभग 1,550 करोड़ रुपये और ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक ने करीब 1,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में कुल 14 भारतीय कंपनियों ने अपना IPO लॉन्च किया और इससे करीब 35,456 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें से भी करीब 58 फीसदी या 20,557 करोड़ रुपये अकेले LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने अपने IPO से जुटाए थे। यह आकंड़ा पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले करीब 32 फीसदी कम है, जब 25 कंपनियों ने कुल 51,979 करोड़ रुपये जुटाए थे।

कुल मिलाकर पब्लिक इक्विटी फंडिंग भी इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में 55 प्रतिशत घटकर 41,919 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 92,191 करोड़ रुपये थी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।