श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी (एसएलडी) का आईपीओ 30 जुलाई को खुल गया है। यह मुंबई की रियल एस्टेट कंपनी है, जिसकी शुरुआत 2015 में हुई थी। इसका फोकस अल्ट्रा-लग्जरी, लग्जरी रेजिडेंशियल और कमर्शियल सेगमेंट पर रहा है। इसने अब तक 10 लाख वर्ग फीट स्पेस डेवलप किया है। इसका टारगेट 3-7 करोड़ रुपये की रेंज के हाई वैल्यू प्रोजेक्ट्स पर रहता है। 792 करोड़ रुपये के इस इश्यू में 1 अगस्त तक निवेश किया जा सकता है।
कंपनी मुंबई के नए इलाकों में उतर रही है
Sri Lotus Developers and Realty Limited (SLD) का फोकस शुरुआत में मुंबई के जुहू और अंधेरी जैसे इलाकों में था। अब यह ज्यादा ग्रोथ की संभावना वाले माइक्रो-मार्केट्स में भी विस्तार कर रही है। इनमें प्रभादेवी, नेपियन सी रोड और घाटकोपर जैसे इलाके शामिल हैं। कंपनी बांद्रा में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। इससे कंपनी के लिए रेवेन्यू के स्रोत बढ़ेंगे। कंपनी के 90 फीसदी प्रोजेक्ट्स रीडेवलपमेंट स्पेस में हैं, जिससे इसे पूंजी की कम जरूरत पड़ती है।
EBITDA मार्जिन 52 फीसदी से ज्यादा
एसएलडी का कंट्रोल लाइफसाइकल की हर कड़ी पर है। इनमें लैंड सोर्सिंग, डिजाइन, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन शामिल हैं। इससे कंपनी को क्वालिटी बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं। इसके प्रोजेक्ट पूरे होने में लगने वाला औसत समय 18-24 महीना है। करीब 12,000 वर्ग फीट रेट से इसका EBITDA मार्जिन 52 फीसदी से ज्यादा है। रिटर्न ऑन इक्विटी भी अच्छा है।
अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान ने किया है निवेश
एसएलडी के पास अभी 16 प्रोजेक्ट्स हैं। इसका कुल सेलेबल एरिया 19.36 लाख वर्ग फीट है। इसमें 5 अंडरकंस्ट्रक्शन और 11 अपकमिंग प्रोजेक्ट्स शामिल है। ज्यादातर प्रोजेक्ट्स कोर मार्केट्स में हैं। कंपनी पहले कुछ दिग्गज इनवेस्टर्स से 399 करोड़ रुपये की पूंजी जुटा चुकी है। इनमें आशीष कचोलिया, शाहरुख खान, राकेश रौशन और अमिताभ बच्च जैसे लोग शामिल हैं। अब कंपनी आईपीओ से 792 करोड़ रुपये जुटा रही है, जिससे इसके पास 1,400-1,600 करोड़ रुपये की पूंजी हो जाएगी।
क्या आपको इनवेस्ट करना चाहिए?
कंपनी के शेयर का प्राइस बैंड 140-150 रुपये है। शेयर की 150 रुपये की कीमत के आधार पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 7,331 करोड़ रुपये आता है। इसका मतलब है कि वैल्यूएशन FY25 की अनुमानित अर्निंग्स का करीब 27 गुना है। कपनी का कैश फ्लो स्ट्रॉन्ग है। हाई मार्जिन वाले प्रोजेक्ट्स हैं। पूंजी की अब कमी नहीं रह गई है। साथ ही एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल को देखते हुए यह आईपीओ लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अट्रैक्टिव लगता है।