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स्टार्टअप्स के लिए आईपीओ पेश करना होगा आसान, सेबी ने मिनिमम शेयरहोल्डिंग के नियम में रियायत दी

कंपनी की स्टॉक्स एक्सचेंज में लिस्टिंग के लिए उसमें प्रमोटर की कम से कम 20 फीसदी हिस्सेदारी जरूरी है। यह हिस्सेदारी लिस्टिंग के बाद कंपनी में अगले तीन साल तक बनी रहनी चाहिए। इस नियम से स्टार्टअप्स को लिस्टिंग में दिक्कत आ रही थी, क्योंकि कई स्टार्पअप्स के निवेशकों से पैसे जुटाने पड़ते हैं। इससे कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी काफ कम रह जाती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 21, 2024 पर 4:15 PM
स्टार्टअप्स के लिए आईपीओ पेश करना होगा आसान, सेबी ने मिनिमम शेयरहोल्डिंग के नियम में रियायत दी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी के इस कदम से उन स्टार्पअप या न्यू एज कंपनियों को लिस्टिंग में आसानी होगी, जिनमें प्रमोटर की हिस्सेदारी कम रह गई है।

स्टार्टअप को खुद को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराना आसान होगा। SEBI ने इसके लिए मिनिमम प्रमोटर कंट्रिब्यूशन (MPC) के नियमों में रियायत दी है। अभी किसी कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराने के लिए उसमें प्रमोटर की कम से कम 20 फीसदी हिस्सेदारी जरूरी है। कई स्टार्टअप पूंजी जुटाने के लिए इनवेस्टर्स को हिस्सेदारी ऑफर करते हैं। इससे कंपनी में उनकी अपनी हिस्सेदारी काफी कम रह जाती है। हिस्सेदारी 20 फीसदी से कम रह जाने पर उनके लिए लिस्टिंग का रास्ता बंद हो जाता है। सेबी ने पिछले हफ्ते कहा कि वह एलिजिबल इनवेस्टर्स की लिस्ट बढ़ाएगी। इसमें ऐसे नॉन-इंडिविजुअल इनवेस्टर्स को भी शामिल किया जाएगा, जिनकी कंपनी में 5 फीसदी या इससे ज्यादा हिस्सेदारी होगी।

आईपीओ पेश करने का प्लान बना रहे स्टार्टअप्स को फायदा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेबी के इस कदम से उन स्टार्पअप या न्यू एज कंपनियों को लिस्टिंग में आसानी होगी, जिनमें प्रमोटर की हिस्सेदारी कम रह गई है। लॉ फर्म S&R Associates के पार्टनर जबराती चंद्रा ने कहा कि मार्केट रेगुलेटर का यह कदम सही दिशा में है। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इससे आईपीओ पेश करने का प्लान बना रहे उन प्रमोटर्स को मदद मिलेगी, जिनकी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी काफी कम रह गई है।"

प्रमोटर की कम से कम 20% हिस्सेदारी अनिवार्य

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