Swiggy IPO Subscription 1st Day: हुंडई मोटर इंडिया के रिकॉर्ड 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद इस साल का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ स्विगी का है। इसका 11,327.43 करोड़ रुपये का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुका है लेकिन इसे निवेशकों का खास रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अभी तक यह महज 12 फीसदी ही भर पाया है। एंप्लॉयीज के लिए आरक्षित हिस्सा 0.74 गुना भर चुका है। अब ग्रे मार्केट में बात करें तो आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से 12 रुपये यानी 3.08 फीसदी की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) चल रही है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स के आधार पर ही आईपीओ में निवेश का फैसला लेना चाहिए।
क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB)- 0.00 गुना
(सोर्स: BSE, 06 Nov 2024 | 05:00:00 PM)
स्विगी के ₹11,327.43 करोड़ के आईपीओ में 6-8 नवंबर तक ₹371-₹390 के प्राइस बैंड और 38 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकेंगे। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर 25 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा। इश्यू का 75 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 10 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 11 नवंबर को फाइनल होगा। फिर BSE और NSE पर 13 नवंबर को एंट्री होगी। इश्यू का रजिस्ट्रार लिंक इनटाइम है।
इस आईपीओ के तहत 4,499.00 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे। इसके अलावा 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 17,50,87,863 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री होगी। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से कंपनी 164.8 करोड़ रुपये से अपनी सब्सिडयिरी Scootsy का कर्ज हल्का करेगी। 1,178.7 करोड़ रुपये से डार्क स्टोर नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, 703.4 करोड़ रुपये तकनीक और क्लाउड इंफ्रा में लगाए जाएंगे, 1115.3 करोड़ रुपये ब्रांड मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन पर खर्च होंगे। बाकी पैसों का इस्तेमाल अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में इसका घाटा 4,179.3 करोड़ रुपये से गिरकर 2,350.2 करोड़ रुपये पर आ गया। इस दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 36 फीसदी बढ़कर 11,247.4 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष की बात करें तो जून तिमाही में कंपनी का घाटा सालाना आधार पर 564 करोड़ रुपये से बढ़कर 611 करोड़ रुपये पर पहुंच गया लेकिन रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़कर 3,222.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।