जेप्टो के आईपीओ को नॉर्जेज के कई फंडों, नॉर्वेजियन सॉवरेन वेल्थ फंड, मोतीलाल ओसवाल और अन्य निवेशकों की बोलियां मिली हैं। इस मामले से जुड़े कई लोगों ने मनीकंट्रोल को यह बताया। इनमें से एक व्यक्ति ने बताया कि जेप्टो के एंकर बुक का करीब 40-45 फीसदी हिस्सा नॉर्जेज और मोतीलाल ओसवाल कवर कर सकती हैं।
जेप्टो के आईपीओ का प्रोसेस अभी चल रहा है। कुछ बड़े म्यूचुअल फंड्स ने भी जेप्टो पर दांव लगाने में दिलचस्पी दिखाई है। वह क्विक कॉमर्स कंपनी के फंड जुटाने के प्लान का हिस्सा बन सकते हैं। जेप्टो, नॉर्जेज और मोतीलाल ओसवाल ने इस बारे में मनीकट्रोल के सवालों के जवाब नहीं दिए।
गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (GPFG) जैसे फंडों के जरिए नॉर्जेज ने पहले से ही कई न्यू-एज कंपनियों में निवेश कर रखा है। इनमें Eternal और Swiggy शामिल है। इनका क्विक कॉमर्स मार्केट में सीधे जेप्टो से मुकाबला है। क्विक कॉमर्स मार्केट में ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट भी मौजूद हैं।
जेप्टो की नई प्री-मनी वैल्यूएशन 4.3 अरब डॉलर और पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब 5.1 अरब डॉलर है। यह अक्तूबर 2025 में US CALPERS और दूसरे निवेशकों के 45 करोड़ डॉलर के निवेश के लिए लगाई गई जेप्टो की 7 अरब डॉलर की वैल्यूएशन का 27 फीसदी है।
जेप्टो की वैल्यूएशन में आई कमी की वजह कंपनी के लगातार निवेश (Cash Burn), मुनाफा बनाने की क्षमता और दूसरे पैमाने हैं, जिनको लेकर सवाल खड़े होते हैं। न्यू-एज कंपनियों के प्राइवेट मार्केट के मुकाबले पब्लिक मार्केट में वैल्यूएशन कम रखने के मामले पहले भी आ चुके हैं। Meesho सहित कुछ कंपनियां ऐसा कर चुकी हैं।
जेप्टो ने पिछले महीने की शुरुआत में सेबी के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) फाइल किया था। कंपनी आईपीओ में नए शेयर इश्यू करेगी। साथ ही इसमें ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) भी शामिल होगा। इसके जरिए पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचेंगे। यह आईपीओ 9,000-10,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है।