सरकार एमएसएमई के पेमेंट से जुड़े 45 दिन के नियम में राहत देने के बारे में सोच रही है। यह नियम 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो चुका है। इस नियम में कई चीजें साफ नहीं हैं। साथ ही यह बहुत सख्त है। यही वजह है कि कारोबारियों ने इस नियम में रियायत देने की मांग सरकार से की है। उनका मानना है कि अगर सरकार की तरफ से रियायत नहीं दी जाती है तो इसका कारोबार पर खराब असर पड़ सकता है। अब सरकार इस नियम में राहत देने के बारे में सोच रही है। इसका ऐलान लोकसभा चुनावों के बाद पेश होने वाले पूर्ण बजट में हो सकता है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पेमेंट पीरियड को बढ़ाकर 60 दिन किया जा सकता है
पहला विकल्प यह है कि 45 दिन के पेमेंट पीरियड (MSME 45 Day payment Rule) को बढ़ाकर 60 दिन किया जा सकता है। इसके अलावा इस साल अंतरिम बजट (Interim Budget) में पेश इनकम टैक्स अमेंडमेंट एक्ट को भी सरकार वापस ले सकती है। इस एक्ट में यह प्रावधान है कि अगर एमएसएमई को पेमेंट 45 दिन के बाद किया जाता है तो पेमेंट करने वाली कंपनी को ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा।
45 दिन पेमेंट का नियम क्या है?
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 43बी(एच) के मुताबिक, अगर कोई बड़ी कंपनी एमएसएमई को लिखित एग्रीमेंट के 45 दिन के अंदर पेमेंट नहीं करती है तो वह एक्सपेंसेज को अपनी टैक्सेबेल इनकम में से नहीं घटा सकेगी। इसका मतलब है कि उसे अपनी इनकम पर ज्यादा टैक्स चुकाना होगा। इस नियम को फाइनेंस एक्ट 2023 के जरिए लागू किया गया है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) सहित कई कारोबारियों ने इस बारे में सरकार को अपनी समस्याओं के बारे में बताया था।
MSME मिनिस्ट्री और फाइनेंस मिनिस्ट्री में चर्चा हो.चुकी है
इस बारे में अधिकारी ने बताया, "एमएसएमई मिनिस्ट्री ने 45 दिन के पेमेंट रूल के बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री से चर्चा की है। इस समस्या का समाधान जुलाई में पेश होने वाले बजट में निकल सकता है। इसके कुछ विकल्प हैं। इस बारे में एमएसएमई मिनिस्ट्री एक प्रस्ताव फाइनेंस मिनिस्ट्री को पेश करने वाली है।" सरकार ने एमएसएमई के हित को ध्यान में रख यह नियम बनाया था। लेकिन, इस नियम से जुड़े कुछ मसलों को लेकर दिक्कत है।
इस नियम को इनकम टैक्स एक्ट से जोड़ने से बढ़ी है परेशानी
अधिकारी ने कहा कि पेमेंट के इस सख्त नियम की वजह से कंपनियां एमएसएमई को अपना एमएसएमई रजिस्ट्रेशन छोड़ने को कह सकती हैं। ये कंपनियां उन्हें कह सकती हैं कि अगर उन्हें उनके साथ बिजनेस करना है तो उन्हें ऐसा करना पड़ेगा। 45 दिन में पेमेंट का यह नियम एमएसएमई एक्ट का हिस्सा है। इसे ज्यादा कारगर बनाने के लिए इसे इनकम टैक्स एक्ट के साथ लिंक कर दिया गया है।