टेस्ला के बॉस एलॉन मस्क (Elon Musk) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ऐलान किया है कि वह अप्रैल में भारत आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। उनका दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत में पहले चरण का मतदान की प्रक्रिया चल रही होगी। पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को होगी और इसके तहत 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चुनाव होंगे। उम्मीद की जा रही है कि मस्क भारत में निवेश योजनाओं का ऐलान कर सकते हैं। इसके तहत उनके द्वारा यहां नई फैक्ट्री खोलने के ऐलान की भी संभावना है।
इससे भारत को निवेश का अहम ठिकाना बनाने के अभियान में भी मदद मिलेगी और दुनिया भर के ऐसे निवेशकों के लिए यह एक बेहतर संकेत होगा, जो चीन से इतर दुनिया में निवेश के बेहतर ठिकाने की तलाश में हैं। यह एक तरह से ब्रांड मोदी के तीसरे कार्यकाल का स्पष्ट समर्थन है। इसके अलावा, यह मोदी के इकोनॉमिक्स का भी समर्थन है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को ऐसे नेता के तौर पर पेश किया है, जो मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस की राह पर चलता है। वह कई रिफॉर्म्स को लेकर काफी सक्रिय रहे हैं, मसलन इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड, बैंक की बैलेंस शीट दुरुस्त करना, जीएसटी की शुरुआत, मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में बढ़ोतरी आदि।
इसके अलावा, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम, जमीन और श्रम से जुड़े सुधार, ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के लिए पुराने नियमों में बदलाव आदि पहल भी मोदी सरकार द्वारा की गई है। यह एक तरह से आत्म-निर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए मोदी सरकार की पहल का भी समर्थन है। हालांकि, मोदी सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि हर हाल में छोटे और मंझोले कारोबारों के हितों की भी रक्षा की जाएगी।
मोदी का कैंपेन जहां मुख्य तौर पर उम्मीद, विकास और आकांक्षाओं की राजनीति है, वहीं राहुल गांधी की रैलियों में भारत के ग्रोथ मॉडल को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर पूंजीवाद पर हमला करते हुए अहम उद्योगपतियों का नाम लेकर आरोप लगाते हैं कि उन्हें सत्ताधारी पार्टी से अनुचित फायदा मिला। बहरहाल, मस्क के दौरे से यह साफ है कि राहुल गांधी के लेफ्ट इकोनॉमिक मॉडल को लेकर गंभीरतापूर्वक नहीं लिया जा रहा है।