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आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः खेतिफाई का नया स्टार्टअप

प्रकाशित Sat, 03, 2017 पर 13:38  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फार्म फ्रेश फल और सब्जियां लेने के लिए हम सुपरमार्केट औरऑनलाइन ग्रोसरी स्टोर के कई चक्कर लगाते हैं। लेकिन अगर आप अपने ही घर में बिल्कुल फ्रेश सब्जियां उगा सकें तो? रूफटॉप फार्मिंग के इसी कॉन्सेप्टको शेहरों तक पहुंचा रहा है एकस्टार्टअप खेतिफाई।


देश का कल्चर एग्रीकल्चर। इस सिद्धांत के साथ साल 2016 में आईआईटी ग्रेचुएट साहिल पारेख और कौस्तुबखारे ने खेतिफाई की शुरूआत की। फल, सब्जी में बढ़ते पेस्टिसाइड्स और फ्रेश, ऑर्गेनिक्स खाना के बढ़ते चलन सेये स्टार्टअप चल पडा। खेतिफाई शेहरों में घरों की छत पर छोटे-छोटे खेत बनाने का काम करता हैं। कंपनी ऐसे कम्पोस्टबेस्ड मोड्युलर खेत रियाशी घरों की छत पर इंस्टाल करता हैं। इस सेट के जरिए 200 स्कवेर फुट की जगह में एकपरिवार एक साल में 700 किलो सब्जियां उगा सकता हैं। 


अपनी छत पर भी इस तरह के खेत का सेटअप करने के लिए 19 हजार की लागत आती है। अर्बम फार्मिंग केबिजनेस को शुरू करने के लिए पहले रिसर्च करने की जरूरत पड़ती है। बीज,जगह और सिंचाई के तरीकों को समझना काफी जरूरी होता है। करीब 15-18 लाख का शुरूआती निवेश 3 लोगों के साथ खेतिफाई की शुरूआत हुई। पिछले दिसंबर में कंपनी को एआईएम स्मार्ट सिटी एक्सिलिरेटर से सीड फंडिग भी मिली है। अपनी छत से शुरु की हुई ये खेती आज दिल्ली के कई हिस्सों तक पहुंच गई है।


साहिल और कौस्तुब अब अपने क्सटमर बेस को बढाने के मकसद से स्कूल हाउसिंग सोसायटी, से संपर्क कर रहें हैं ताकी ज्यादा से ज्यादा लोग इस चैन का हिस्सा बन सकें। 2017 के अंक क कंपनी 50 स्कूल और 150 हाउसहोड के लिए प्रयाप्त सब्जियां उगाने के मकसद से काम कर रहीं हैं। अर्बन एग्रीकल्चर के चलन को जोर देने के लिए कंपनी अपने साथ किसानों को भी जोडना चाहती हैं।


खेतिफाई जहां आपकी घर या अपार्टमेंट बिल्डिंग की छत को एक अर्बन फार्म बना रहा हैं वहीं देश में वर्टिकल गार्डनिंग का चलन शुरू कर रहें हैं। वचुर्अल गार्डनिंग यानि दीवारों पर फूल या सब्जी उगाने पर भी ध्यान दे रहे हैं। छोटे घरों को प्रकृति के करीब लाने का ये काम कर रहा है ग्रीन। 2013 में शुरू हुआ ये स्टार्टअप मुंबई, पुणे जैसे शहर में ज्यादा पॉपुलर है।


अर्बन फार्मिंग का ये ट्रेंड काफी जोर पकड़ रहा है, अपने घर को प्राकृतिक टच देने पर लोग फोकस कर रहे हैं। जिसकी वजह से लोग ये छोटे घर जहांछत नहीं है, उन घरों के लिए फायदेमंद है।