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इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव का कैसे करें सामना, बाजार से रहें दूर या खोजें अवसर!

Balanced Advantage Fund (BAF) में निवेश करना उतार-चढ़ाव से निपटने का एक और तरीका है.
अपडेटेड Jul 11, 2021 पर 09:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

RAHUL JAIN, Edelweiss Wealth Management.


इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव के डरने की जगह उसका सामना करना ज्यादा अहम है। स्मार्ट इनवेस्टर वही होता है जो वोलैटाइल मार्केट में अच्छे मौके ढूंढ लेता है। आइये देखते हैं इक्विटी मार्केट की आपदा वोलैटिलिटी को हम कैसे अवसर में बदल सकते हैं।


इवक्विटी निवेश और वौलैटिलिटी दोनों का चोली दामन का साथ है। खासकर शॉर्ट टर्म के लिए इक्विटीज को अक्सर वोलैटाइल एसेट ही माना जाता है। ऐसे में कोरोना महामारी कोढ़ में खाज का काम कर रही है। हालांकि कोरोना के खिलाफ टीकाकरण की मुहिम जोर पकड़ रही है और इसकी दूसरी लहर थमती नजर आ रही है।


लेकिन बाजार में वोलैटिलिटी की तलवार लटकी हुई है और निवेशक कुछ ज्यादा ही रिएक्शन कर रहे हैं। बाजार में जोरदार तेजी के बाद अब एक करेक्शन की आशंका जोर पकड़ रही है। इसके अलावा कोरोना की तीसरी लहर का डर भी इक्विटी इनवेस्टरों में चिंता का सबब बनी हुई है। हालांकि एक बात ध्यान रखने की है कि वोलैटिलिटी का सामना करना उससे डरने से कही बेहतर है। स्मार्ट निवेशक वही है जो आपदा में भी अवसर खोज ले।


बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के मंत्र


सबसे पहले अपने निवेश लक्ष्य का मूल्यांकन करें और यह देखें कि आप किस लिए निवेश कर रहे हैं। अगर आप 1-2 साल के लिए ही निवेश कर रहे हैं तो सबसे बेहतर रणनीति यही होगी कि अपने मुनाफे को वसूल लें और मुनाफे के पैसे को शॉर्ट टर्म डेट फंड में डाल दें।


ऐसा करने के बाद यह सोचना भूल जाएं कि बाजार ऊपर जाएगा या नीचे। क्योंकि शॉर्ट टर्म डेट फंड ऐसी सिक्योरिटीज में पैसे लगाते हैं जो एक साल तीन साल में मैच्योर होती हैं। इस तरह के फंड काफी लिक्विड भी होते हैं। क्योंकि इनका निवेश कमर्शियल पेपर्स और सरकारी सिक्योरिटीज में होता है। दूसरी तरफ अगर आपका कोई गोल 5-8 साल की अवधि के लिए है तो आपके पास 2 विकल्प हैं।


पहला तो यह है कि आप अपना निवेश बनाए रखें। अगले 2-3 साल के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव पर कोई ध्यान ही न दें। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं और बीच-बीच में अपना निवेश देखते रहते हैं तो लिक्विडिटी आधारित उतार-चढ़ाव आप मे डर पैदा कर सकता है और आप गलत निर्णय ले सकते हैं।


दूसरा विकल्प यह है कि अपने इनवेस्टमेंट को टुकड़ों में बांटे और अपनी सारी पूंजी एक ही बार में इक्विटीज में न लगाएं। किसी लिक्विड फंड में अपना पैसा रखें और अगले कुछ सालों के लिए एक सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान शुरू करें। इस तरीके से आप अपने इमोशन को मैनेज करते हुए अपनी वेल्थ में इजाफा कर सकते हैं।


Balanced Advantage Fund में करें निवेश


Balanced Advantage Fund (BAF) में निवेश करना उतार-चढ़ाव से निपटने का एक और तरीका है। BAF ऐसे फंड होते हैं जो मार्केट की कंडीशन के हिसाब से अपना एलोकेशन बदलते रहते हैं और उसी हिसाब से इक्विटी और डेट के बीच हेर-फेर भी करते रहते हैं।


पोर्टफोलियो को Diversify करें


पोर्टफेोलियो का डाइवर्सिफिकेशन एक ऐसा तरीका है जो न सिर्फ आपको बाजार के वोलैटिलिटी से निपटने में सहायता करता है बल्कि यह आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता भी प्रदान करता है। यह न सिर्फ आपको अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश की सुविधा देता है बल्कि इसमें आपको एक ही एसेट क्लास के अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट में निवेश की सुविधा मिलती है। जैसे की अगर आप सिर्फ इक्विटीज में निवेश करते हैं तो भी आप अपने निवेश को लार्ज मिड और स्माल कैप में बांट सकते हैं। इसके अलावा आपको अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में भी निवेश का लाभ मिल सकता है। जब आप किसी विदेशी बाजार की इक्विटी में निवेश करते हैं तो इससे आपके पोर्टफोलियो पर डोमेस्टिक फैक्टरों का असर नहीं पड़ता।


निष्कर्ष


जानकारों का कहना है कि कुछ समय तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और ऐसी स्थिति में धैर्य बनाए रखें और डर और भावनाओं से प्रभावित होकर कोई निर्णय न लें। वास्तव में यह उतार-चढ़ाव आपके पोर्टफोलियो में अच्छे क्वालिटी के स्टॉक को जोड़ने का एक अच्छा मौका है। इस समय तमाम क्वालिटी शेयर सस्ते भाव में मिल रहे हैं। जो लंबी अवधि में जोरदार कमाई करा सकते हैं।



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