कोरोना वायरस महामारी के कारण अनिश्चितता और उठापटक भरे माहौल के बावजूद इंडियन इक्विटी मार्केट की कुल बाजार पूंजी (m-cap) 3 ट्रिलियन डॉलर यानी 3 लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो गया है। यह दावा घरेलू ब्रोकरेज और इंवेस्टमेंट फर्म मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने किया।

मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण वर्ष 2020 में लॉकडाउन और कोरोना प्रतिबंधों के बीच FY21 की दूसरी छमाही में भारतीय बाजारों में ब्रॉडबेस्ड रिकवरी देखने को मिली जो वर्ष 2021 में भी जारी है। ब्रोकरेज फर्म ने उम्मीद जताई कि कोविड के केस कम होने और वैक्सीनेशन के रफ्तार पकड़ने के बाद भारत के लिए चीजें और आसान हो जाएंगी।

मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय बाजार का m-cap 2.5 ट्रिलियन हो जाने के बाद इसे 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में केवल 5 महीने का समय लगा। आपको बता दें कि भारतीय इक्विटी मार्केट का m-cap वर्ष 2007 में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा था। जबकि इसका m-cap 2.5 ट्रिलियन दिसंबर 2020 में हुआ। इस वजह से बाजार पूंजी के मामले में भारत विश्व में 8वें पायदान पर है।

बाजार पूंजी के मामले में 47.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका पहले और 11.4 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन दूसरे स्थान पर है। वहीं हॉन्गकॉन्ग 7 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे और जापान 6.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ m-cap के मामले में चौथे स्थान पर है। इसके बाद ब्रिटेन 3.7 ट्रिलियन डॉलर, फ्रांस 3.3 ट्रिलियन और कनाडा 3.1 ट्रिलियन डॉलर के साथ 7वें नंबर पर है। इसके बाद भारत का स्थान है।

इस रिपोर्ट में मोतीलील ओसवाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों मे मार्केट कैपिटल में टॉप 100 कंपनियों की हिस्सेदारी घटी है। वर्ष 1999 में जहां देश के m-cap में 83% हिस्सेदारी देश की टॉप 100 कंपनियों की थी वहीं अब यह 70% पर आ गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, टॉप 101 से टॉप 250 कंपनियों का m-cap में हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 16.5% हो गया है।

भारत के m-cap में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), TCS, HDFC बैंक, हिन्दुस्तान यूनिलीवर (HUL), HDFC Ltd, ICICI बैंक, SBI, कोटक महिंद्रा बैंक और बजाज फाइनेंस की है। ये देश की टॉप 10 कंपनियां हैं। 

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