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SEBI ने स्टार्टअप्स की लिस्टिंग के नियमों को बनाया आसान, ये अहम बदलाव हुए

सेबी ने स्टार्टअप्स लिस्टिंग के नियमों को आसान बनाया है, इसके लिए SEBI ने प्री-कैपिटल इश्यू के होल्डिंग पीरियड को कम करने के साथ और भी कई कदम उठाए हैं
अपडेटेड May 08, 2021 पर 11:27  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अधिक से अधिक स्टार्टअप्स (start-ups) की लिस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने स्टार्टअप्स लिस्टिंग के नियमों को आसान बनाया है। इसके लिए सेबी ने प्री-कैपिटल इश्यू के होल्डिंग पीरियड को कम करने के साथ और भी कई कदम उठाए हैं। सेबी ने दो नोटिफिकेशन जारी करते हुए इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) पर स्टार्टअप्स की लिस्टिंग के फ्रेमवर्क में बदलाव किया है। 

इस संबंध में SEBI के बोर्ड ने मार्च 2021 में ही मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही SEBI ने डिलिस्टिंग के नियमों को भी आसान बनाया है और कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के माइग्रेशन की गाइडलिंस में भी छूट दी है। सेबी ने ये बदलाव देश में स्टार्टअप्स के इको-सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। 

स्टार्टअप्स को लिस्टिंग के नियमों को आसान बनाते हुए 25% प्री-इश्यू कैपिटल होल्डिंग की समय-सीमा को 2 साल से घटाकर 1 साल कर दिया गया है। सेबी ने कहा कि IGP पर इश्यूअर कंपनी को पब्लिक इश्यू लॉन्च करने से पहले अपने इश्यू साइज का 60% शेयर योग्य इंवेस्टर को एलॉट करने की छूट होगी। ऐसे शेयर्स का लॉकइन पीरियड 30 दिनों का होगा।

लेकिन इसमें शर्त यह होती कि उस स्पेसिफाइड सिक्योरिटीज का प्राइस दूसरे निवेशकों को एलॉट किए गए शेयर से कम नहीं होगा। इसके साथ ही योग्य निवेशक कम से कम 50 लाख रुपये के सिक्योरिटीज के लिए आवेदन कर सकेंगे। अभी कोई भी कंपनी अपने मन से निवेशकों को शेयर नहीं एलॉट कर सकती है। 

मुख्यधार की कंपनियों के IPO की तरह ही स्टार्टअप्स यानी इश्यूअर कंपनी, जिनके पास प्रमोटर्स और फाउंडर्स के सुपीरियर वोटिंग राइट्स इक्विटी शेयर हैं, उन्हें IGP फ्रेमवर्क के तहत लिस्टिंग की अनुमति मिलेगी। इसके साथ ही ओपन ऑफर के थ्रेसहोल्ड को 25% से बढ़ाकर 49% कर दिया गया है।

SEBI ने कहा कि वैसी कंपनी जिनके सिक्योरिटीज IGP प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करते हैं, वे चाहें तो IPO लॉन्च करने की स्थिति में इस प्लेटफॉर्म से एग्जिट कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए कंपनी को अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से मंजूरी लेनी होगी। सेबी ने कहा कि इस एग्जिट को कंपनी के शेयरहोल्डर्स की अप्रूवल जरूरी होगा और इसके लिए पोस्ट बैलट या ई-वोटिंग के जरिये स्पेशल रेजोल्यूशन पास कराना होगा।

सेबी ने कहा कि कंपनियों की डीलिस्टिंग को तब सफल माना जाएगा, जब इश्यू किए गए टोटल शेयर का 75% कंपनी के प्रमोटर स्वीकार कर लेंगे या खरीद लेंगे। साथ ही पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास पड़े कम से कम 50% शेयर टेंडर किए जाएंगे और स्वीकार किए जाएंगे। यानी कंपनी के प्रमोटर्स को पब्लिक को जारी 50% शेयर खरीदने होंगे। सेबी के नोटिफिकेशन के मुताबिक नए नियम 5 मई, 2021 से प्रभावी हो गए हैं।

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