Air India Divestment: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयर इंडिया के लिए सफल बोली लगाने वाले टाटा संस (Tata Sons) को एयरलाइन के सभी कर्मचारियों को एक साल तक बनाए रखना होगा। इस अवधि के बाद कर्मचारियों की छंटनी के लिए कंपनी को उन्हें VRS (Voluntary Retirement Scheme) की पेशकश करनी होगी।

नागरिक उड्डयन सचिव राजीव बंसल (Rajeev Bansal) ने शुक्रवार को कहा कि विजेता टाटा संस सभी कर्मचारियों को बनाए रखेगा, जिसका अर्थ है कि वे एक साल की अवधि के लिए किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं करेंगे। इसके बाद, दूसरे साल के दौरान यदि किसी कर्मचारी की छंटनी या हटाया जाता है तो न्हें वीआरएस की पेशकश की जाएगी।

Air India Disinvestment Live Updates: टाटा संस ने Air India की नीलामी जीत ली

बंसल ने आगे बताया कि आज की तारीख में एयर इंडिया में 12,085 कर्मचारी हैं जिसमें से 8,084 स्थायी कर्मचारी हैं और 4,001 कर्मी कॉन्ट्रैक्ट पर हैं। इसके अलावा एयर इंडिया एक्सप्रेस में 1434 कर्मचारी हैं। 1 साल और तक अगर उनकी छटाई होगी तो उनको वीआरएस देना होगा।

टाटा को मिली एयर इंडिया की कमान

टाटा संस ने भारी कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के अधिग्रहण की बोली जीत ली है। सरकारी कंपनियों के निजीकरण की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एक विशेष इकाई (एसपीवी) सफल बोलीदाता के रूप में उभरी है।

दीपम के सचिव ने कहा कि टाटा की 18,000 करोड़ रुपये की बोली में 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज लेना और बाकी का नकद भुगतान करना शामिल है। अब Air India का 15300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा चुकाएगी। एयर इंडिया पर 31 अगस्त तक 61,560 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें 15300  करोड़ रुपए टाटा संस चुकाएगी जबकि बाकी के 46,262 करोड़ रुपए AIAHL (Air India asset holding company) भरेगी।

जहांगीर रतनजी दादाभाई (JRD) टाटा ने 1932 में एयरलाइन की स्थापना की। तब इसे टाटा एयरलाइंस कहा जाता था। 1946 में टाटा संस के विमानन प्रभाग को एयर इंडिया के रूप में सूचीबद्ध किया गया था और 1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल को यूरोप के लिए उड़ानों के साथ शुरू किया गया था। अंतरराष्ट्रीय सेवा भारत में पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी में से एक थी, जिसमें सरकार की 49 प्रतिशत, टाटा की 25 प्रतिशत और जनता की शेष हिस्सेदारी थी।

1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया था। सरकार सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है, जिसमें एयर इंडिया की एआई एक्सप्रेस लिमिटेड में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।