अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए सरकार MSMEs सेक्टर का दायरा बढ़ाने जा रही है। MSME का दायरा 10 करोड़ से बढ़कर 250 करोड़ रुपए हो सकता है। वहीं 5 करोड़ रुपए तक को माइक्रो उद्योग का दर्जा संभव है जबकि 5-75 करोड़ रुपए तक को स्मॉल उद्योग का दर्जा मिल सकता है।
सरकार कंपनी के टर्नओवर के मुताबिक हर कैटेगरी के लिए अलग परिभाषा तय करेगी। सरकार मैन्युफैक्चरिंग के लिए 3 से ज्यादा कैटेगरी पर विचार कर रही है। जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट और टैक्सटाइल के लिए भी अलग परिभाषा तय की जायेगी। वहीं पेमेंट में देरी और GST रिफंड की व्यवस्था होगी।
सरकार नए अमेंडमेंट बिल को जल्द लाने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए NPA से निपटने के लिए 5000 करोड़ रुपये का डिस्ट्रेस फंड तैयार किया जायेगा। GDP में सरकार का MSMEs के जरिए 50 फीसदी तक के योगदान का लक्ष्य है। अभी MSMEs का GDP में करीब 30 फीसदी योगदान है।