कई बैंकों के करोड़ों रुपये के कर्ज बकाया रखने वाली वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण करने की राह देख रहे वेदांता ग्रुप के अनिल अगरवाल को झटका लगा है। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) के दो सदस्यीय पीठ की अगुवाई कर रहे एनसीएलएटी के चेयरमैन अशोक इकबाल सिंह चीमा (Ashok Iqbal Singh Cheema) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र और आईएफसीआई लिमिटेड द्वारा दायर की गई दो अपील पर गौर करते हुए इस लेन-देन पर स्टे ऑर्डर यानी स्थगनादेश दिया है।
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज पर 64838.63 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस बकाया कर्ज की वसूली के लिए बैंकों ने कंपनी के दिवालिया होने के बारे में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण में दावा दायर किया था। वेदांता समूह के अनिल अगरवाली के स्वामित्व वाली ट्विन स्टार टेक्नोलॉजिस (Twin Star Technologies) ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को खरीदने की इच्छा जताई थी। इसके लिए 2962.02 करोड़ रुपये देने के प्रस्ताव के एनसीएलएटी की मुंबई खंडपीठ ने 9 जून को मंजूरी दी थी।
हालांकि 62100 करोड़ रुपये के कर्ज की (करीब 96 प्रतिशत) रकम को बट्टे में डालने के लिए कर्जदाता बैंकों को मजबूर करने के प्रस्ताव के विरोध में दायर याचिका पर राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण ने संज्ञान लिया और एनसीएलएटी की मुंबई खंडपीठ के आदेश पर स्टे ऑर्डर जारी किया। अब इस बारे में अगली सुनवाई 7 सितंबर को आयोजित होगी।