क्रिप्टोकरेंसीज के लिए पिछले कुछ महीने उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। ट्वीट्स, सोशल मीडिया पर कमेंट्स और कुछ क्रिप्टोकरेंसीज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखने वाले लोगों की एडवाइज से इनकी कीमतें तेजी से बढ़ी थी। इसके बाद किसी भी अन्य एसेट क्लास की तरह इनवेस्टर्स ने इसमें खरीदारी शुरू कर दी थी।
एक सप्ताह से भी कम में नकारात्मक खबरों और अफरातफरी के कारण क्रिप्टोकरेंसीज के मार्केट में 600 अरब डॉलर से भी अधिक की गिरावट आई है। बहुत से रिटेल इनवेस्टर्स भारी नुकसान में हैं। इस तरह की स्थितियां अन्य एसेट क्लास में पहले देखी जा चुकी हैं।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से पहले इसके फंडामेंटल्स को समझना चाहिए। हम यहां इस बारे में जानकारी दे रहे हैं।
कॉइन या टोकन लॉन्च करने वाला प्रत्येक प्रोजेक्ट क्वॉलिटी से जुड़ी कुछ पहलु तैयार करता है। इन पहलुओं की जानकारी व्हाइटपेपर में दी जाती है। व्हाइटपेपर वह टेक्निकल डॉक्यूमेंट होता है जो प्रत्येक प्रोजेक्ट अपनी वेबसाइट पर संभावित इनवेस्टर्स के लिए रखता है। इसमें प्रोजेक्ट की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी, इसकी ओर से दिए जाने वाले सॉल्यूशन, इसकी योजनाओं और इसके टोकन की सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन के बारे में बताया जाता है।
प्रोजेक्ट की ओर से टोकंस को कैसे डिस्ट्रीब्यूट किया जाएगा और उन टोकंस से मिलने वाले फंड का कैसे इस्तेमाल होगा, इसकी जानकारी से इनवेस्टर्स यह समझ सकते हैं कि कि कॉइन की माइनिंग होनी चाहिए या नहीं।
शेयर्स की तरह ही क्रिप्टोकरेंसी में इनवेस्टमेंट से पहले स्टेबिलिटी, रिटर्न, लिक्विडिटी और ट्रेड होने वाली वॉल्यूम पर ध्यान देना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी में मार्केट कैपिटलाइजेशन को सर्कुलेशन में मौजूद सप्लाई को मौजूदा प्राइस से गुणा कर कैलकुलेट किया जाता है।
क्रिप्टो टोकन ब्लॉकचेन पर बेस्ड होते हैं और उनका डेटा आसानी से उपलब्ध होता है। इस वजह से प्रत्येक टोकन के ब्लॉकचेन एनालिसिस पर विचार करना चाहिए। बहुत सी वेबसाइट्स इससे जुड़ा डेटा देती हैं लेकिन इसकी अन्य स्रोतों से पुष्टि भी करनी चाहिए जिसमें पसंद वाले नेटवर्क के लिए एक नोड को रन करना शामिल है।