आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कंजम्प्शन से जुड़े शेयरों में बड़ी तेजी आ सकती है। एडलवाइज एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीआईओ (इक्विटीज) त्रिदीप भट्टाचार्य ने यह कहा है। उन्होंने शेयर बाजार के बारे में कई अहम बातें बताईं। उनका मानना है कि भारतीय शेयर बाजार बुरा वक्त पीछे छोड़ चुके हैं।
जीएसटी में कमी से भी कंजम्प्शन शेयरों में आई थी तेजी
भट्टाचार्य ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर कंजम्प्शन शेयरों पर उसका असर दिखेगा। उन्होंने कहा कि यह असर पिछले साल जीएसटी में कमी के जैसा हो सकता है। पिछले साल सितंबर में जीएसटी में कमी लागू हुई थी। इसके बाद के 3 से 5 महीनों में कंजम्प्शन शेयरों में तेजी दिखी थी।
भारतीय बाजार निगेटिव चीजों को पीछे छोड़ चुके हैं
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि निगेटिव चीजों को हम पीछे छोड़ चुके हैं। यही वजह है कि कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में एक ट्रेंड दिख रहा है।" उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल के 10-12 फीसदी से बढ़कर 18-20 फीसदी रहेगा। इसका असर अभी मिडकैप प्राइवेट बैंक शेयरों पर नहीं पड़ा है।
भट्टाचार्य का आईटी स्टॉक्स पर न्यूट्रल नजरिया
उन्होंने ऑटो और होटल जैसे डिस्क्रेशनरी सेक्टर्स में इस साल की दूसरी छमाही में तेजी आने की उम्मीद जताई। आईटी पर उन्होंने अपना नजरिया न्यूट्रल बनाए रखा है। उन्होंने ऑटो के अलावा होटल्स और रिटेल सेक्टर्स के अपनी पंसद बताया। उनका मानना है कि दूसरी छमाही में इन सेक्टर में तेजी दिख सकती है।
सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस में डायवर्सिफिकेश का फायदा
भट्टाचार्य ने ऑटो एंसिलियरीज शेयरों के भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई। उनका मानना है कि रुपये में कमजोरी से निर्यात के लिहाज से इस सेक्टर की कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उन कंपनियों को फायदा होगा जो ऑटो के अलावा सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डिफेंस एक्सपोर्ट्स में डायवर्सिफाय कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं बताया।
शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव
11 अगस्त को भारतीय शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 1 बजे निफ्टी 0.49 फीसदी यानी 120 अंक गिरकर 24,462 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.47 फीसदी यानी 367 अंक की गिरावट के साथ 78,172 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.44 फीसदी की तेजी दिखी। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर आईटी शेयर हरे निशान में चल रहे थे।