दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने शेयर बाजार में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे थे। उन्हें स्टॉक मार्केट्स की गजब की समझ थी। उनमें उन शेयरों को पहचानने की गजब की काबिलियत थी, जो बाद में मल्टीबैगर बनने वाले होते थे। इसके बावजूद उन्हें कई बार जीरो रिटर्न और नाममात्र के रिटर्न से संतोष करना पड़ा था।
हर साल शेयर बाजार से कमाई नहीं होती
झुनझुनवाला ने एक बार कहा था, "मैं हर साल बाजार से पैसे नहीं कमाता। मैंने 1989-92, 2003-07, 2009-2011 में पैसे कमाए। लेकिन, 1994-99 के बीच ट्रेडिंग से कोई इनकम नहीं हुई।" आज उनकी यह बात बहुत मायने रखती है, क्योंकि शेयर बाजार लगातार गिर रहा है। बीते डेढ़ साल से निवेशकों को बाजार से रिटर्न नहीं मिला है। इनमें कई ऐसे निवेशक हैं, जिन्होंने पहले कभी बाजार में गिरावट का लंबा दौर नहीं देखा है।
सितंबर 2024 के बाद से गिर रहा है बाजार
कोविड की शुरुआत के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बाजार में पैसे लगाने शुरू किए थे। तब कुछ ही महीने में बाजार में बड़ी रिकवरी आई थी। नए निवेशकों को अपने निवेश पर अच्छी कमाई हुई थी। सितंबर 2024 के अंत में शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। उसके बाद से शेयर बाजारों में गिरावट जारी है। इसमें विदेशी फंडों की बिकवाली का बड़ा हाथ है।
बाजार सिर्फ एक दिशा में नहीं चलता है
शेयर बाजार में गिरावट से निराश निवेशकों को झुनझुनवाला की बात पर गौर करने की जरूरत है। शेयर बाजार एक दिशा में नहीं चलता है। बाजार अगर कुछ सालों में तेजी से बढ़ता है तो वह अगले कुछ सालों में तेजी से गिर भी सकता है। फिलहाल, शेयर बाजारों में गिरावट जारी है। बाजार दो कदम आगे बढ़ा रहा है फिर तीन कदम पीछे जा रहा है। इससे निवेशक मायूस है।
पहले भी बाजार ने कई बार नहीं दिया रिटर्न
दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं है कि भारतीय शेयर बाजार ने बीते दो सालों से रिटर्न नहीं दिया है। पहले भी ऐसा हो चुका है। लेकिन, अगर लंबे टाइमफ्रेम में देखा जाए तो बीच-बीच में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ा पैसा बना है। उन्होंने कहा कि अगर बीते 45 सालों के इतिहास को देखा जाए तो सेंसेक्स में 100 रुपये का निवेश 75,000 रुपये हो गए हैं। अगर इसमें डिविडेंड जोड़ दिया जाए तो यह करीब 1,20,000 रुपये हो जाता है।
लंबी अवधि के निवेशकों को गिरावट से परेशान नहीं होना चाहिए
उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में ऐसा समय आता है, जब पैसे नहीं बनते हैं। लंबी अवधि के निवेशकों को इससे परेशान नहीं होना चाहिए। सेंसेक्स के 47 सालों के इतिहास में 14 साल ऐसे हैं, जब मार्केट ने निगेटिव रिटर्न दिया। 5 सालों का एक ऐसा भी दौर थ, जब मार्केट ने रिटर्न नहीं दिया। एक बार तो निवेशकों को रिटर्न के लिए 10 साल तक इंतजार करना पड़ा था।