भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आ चुकी है। 18 महीनों के कंसॉलिडेशन, उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन में गिरावट के बाद बाजार में अब स्थितियां बेहतर हो रही हैं। देश के बड़े फंड मैनेजर्स का यह कहना है। मनीकंट्रोल के बेंगलुरु में आयोजित एक प्रोग्राम में हर्ष उपाध्याय, हरीश कृष्णन और पंकज टिबरेवाल ने भारतीय बाजारों के बारे में कई अहम बातें बताईं। उन्होंने शॉर्ट टर्म में अनिश्चितता के बावजूद इनवेस्टर्स को भारतीय शेयर बाजारों में निवेश करने की कई वजहें बताईं।
1. वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर
फंड मैनेजर्स का मानना है कि छोटे-बड़े शेयरों की कीमतों में हाल में बड़ी गिरावट के बाद वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं। हर्ष उपाध्याय ने कहा, "बाजार में ऐसे स्टॉक्स हैं, जिनमें फेयर या उनकी लॉन्ग टर्म एवरेज वैल्यूएशंस से कम पर ट्रेडिंग हो रही है।" उन्होंने कहा कि इसकी वजह मार्केट में आई गिरावट है। इससे लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से रिस्क-रिवॉर्ड इक्वेशन बेहतर हो गया है।
2. आर्थिक मजबूती के लिहाज से कम है एम-कैप
हरीश कृष्णन ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी में भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से भारतीय बाजार का मार्केट कैपिटलाइजेशन कम है। उन्होंने कहा कि दुनिया की जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी है। लेकिन, ग्लोबल मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारतीय बाजार की हिस्सेदारी करीब 3 फीसदी है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय बाजार से दूरी बनाने की जगह निवेश करने का सही समय है।
3. कई सेक्टर्स में दिख रहे रिकवरी के संकेत
फंड मैनेजर्स का मानना है कि कई ऐसे सेक्टर्स हैं, जिनमें लंबे समय तक कमजोरी के बाद अर्निंग्स साइकिल्स और इंडस्ट्री से जुड़ी स्थितियां बेहतर हो रही हैं। टिबरेवाल ने कहा कि केमिकल्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस से जुड़ी ऑटो एंसिलियरी स्ट्रक्चरल ग्रोथ की थीम के रूप में उभर रही हैं। खासकर केमिकल सेक्टर कई सालों तक चीन की कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के बाद रिकवर कर रहा है। अगले 3-5 सालों में इन सेक्टर में मौके दिख रहे हैं।
4. प्राइवेट बैंकों में बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड
कई सालों तक कमजोर प्रदर्शन के बाद प्राइवेट बैंकों की स्थिति अच्छी दिख रही है। ज्यादा प्रीमियम पर चलने वाले कई प्राइवेट बैंकों के शेयर अब काफी नीचे आ चुके हैं। उनकी बैलेंसशीट अच्छी है और एसेट क्वालिटी में इम्प्रूवमेंट है। क्रेडिट ग्रोथ अच्छी रहने पर प्राइवेट बैंकों के शेयरों में तेजी दिख सकती है।
5. इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी में बदलाव की जरूरत
फंड मैनेजर्स का कहना है कि निवेश की स्थितियां बदल रही हैं। ऐसे में स्ट्रेटेजी में बदलाव जरूरी है। ऐसे में इनवेस्टर्स को शेयरों में तेजी के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। उपाध्याय ने कहा कि बाजार में अब कुछ खास शेयरों में निवेश के मौके पहचानने होंगे। अगले 12-18 में महीनों में उन शेयरों में निवेश से पैसा बनेगा, जिनकी कीमतें निचले स्तर पर हैं।
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