अमेरिका सहित सभी प्रमुख स्टॉक्स एक्सचेजों में बड़ी बिकवाली दिखी है। इससे अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी के अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अनुमान से पहले इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है। हाल में इकोनॉमी से जुड़े संकेतों पर फेडरल रिजर्व ने जिस तरह से प्रतिक्रिया जताई है, उससे मार्केट पार्टिसिपेंट्स यह सवाल कर रहे हैं कि क्या फेडरल रिजर्व सही समय पर फैसला लेने से चूक गया? अब मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि फेडरल रिजर्व का रुख आक्रामक हो सकता है। वह सितंबर में इंटरेस्ट रेट मे कमी का सिलसिला शुरू कर सकता है।
अमेरिका में नई नौकरियों के मौके उम्मीद से कम
अमेरिका में लेबर डिपार्टमेंट ने जुलाई की अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका में सिर्फ 1,14,000 नई नौकरियों के मौके बने। यह उम्मीद से काफी कम है। इससे अमेरिका में बेरोजगारी दर जून के 4.1 फीसदी से बढ़कर जुलाई में 4.3 फीसदी पर पहुंच गया। रोजगार के डेटा आने के बाद इंटरेस्ट रेट फ्यूचर्स से सितंबर में इंटरेस्ट रेट में आधा फीसदी कमी की करीब 70 फीसदी संभावना दिख रही है। रायटर्स ने यह जानकारी दी है। 17 सितंबर-18 सितंबर के बीच फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की बैठक होने वाली है। पहले सितंबर में एक-चौथाई फीसदी कमी का अनुमान था।
इंटरेस्ट रेट में लगातार कमी कर सकती है फेडरल रिजर्व
गोल्डमैन सैक्स ने फेडरल रिजर्व की आगे होने वाली बैठकों में इंटरेस्ट रेट में लगातार कमी का अनुमान जताया है। सिटीग्रुप और जेपी मॉर्गन चेज दोनों ने इंटरेस्ट रेट्स में सितंबर और दिसंबर में आधा-आधा फीसदी कमी के अनुमान जताए है। जेपी मॉर्गन का तो यहां तक कहना है कि फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक से पहले ही इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है। इससे यह पता चलता है कि मार्केट में आम तौर पर यह माना जा रहा है कि अमेरिकी इकोनॉमी से जुड़े हाल के डेटा को देखते हुए फेडरल रिजर्व अपनी पॉलिसी में बदलाव करने में देर की है।
जुलाई में फेडरल रिजर्व ने नहीं घटाया था इंटरेस्ट रेट
पिछले हफ्ते की शुरुआत में फेडरल रिजर्व ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था। उसने इंटरेस्ट रेट 5.25 से 5.50 फीसदी बनाए रखा था। रायटर्स की एक रिपोर्ट में एलेक्स वेल्थ मैनेजमेंट के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रियन जेकबसन के हवाल से कहा गया है, "अगर पॉवेल को पहले ही मौजूदा स्थिति का पता चल जाता तो वह रेट घटाने का फैसला ले सकते थे। इनफ्लेशन गिरने के बीच इंटरेस्ट रेट में कमी नहीं करने का मतलब है कि फेडरल रिजर्व ने ब्रेक पर काफी ज्यादा दबाव बनाया है।"