Vedanta Demerger: जून में लिस्ट हो जाएंगी वेदांता से अलग हो रहीं चारों कंपनियां, अनिल अग्रवाल ने किया कंफर्म; शेयरहोल्डर्स के लिए क्या बदलेगा?

Vedanta Demerger: कंपनी ने डीमर्जर के लिए शुक्रवार, 1 मई को रिकॉर्ड डेट तय किया था। वेदांता लिमिटेड के शेयर 30 अप्रैल 2026 से डीमर्जर के हिसाब से एडजस्ट होकर ट्रेड करने लगे हैं। डीमर्जर के बाद बेस मेटल कारोबार वेदांता लिमिटेड के तहत ही रहने वाला है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 3:54 PM
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वेदांता लिमिटेड अपने ​डीमर्जर प्लान के तहत 5 कंपनियों में बंट रही है।

डीमर्जर के तहत वेदांता लिमिटेड से अलग होने वाली चारों कंपनियां अगले महीने यानि कि जून में शेयर बाजार में लिस्ट हो जाएंगी। CNBC-TV18 के साथ एक खास इंटरव्यू में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस बात की पुष्टि की है। वेदांता लिमिटेड अपने ​डीमर्जर प्लान के तहत 5 कंपनियों में बंट रही है। डीमर्जर के बाद बेस मेटल कारोबार वेदांता लिमिटेड के तहत ही रहने वाला है। वेदांता एल्युमीनियम, तलवंडी साबो पावर, वेदांता स्टील एंड आयरन और माल्को एनर्जी बाकी की 4 कंपनियां होंगी। इन्हें अलग-अलग लिस्ट कराया जाएगा।

बता दें कि वेदांता लिमिटेड के शेयर 30 अप्रैल 2026 से डीमर्जर के हिसाब से एडजस्ट होकर ट्रेड करने लगे हैं। 30 अप्रैल को स्टॉक की ट्रेडिंग BSE पर ₹290.50 और NSE पर ₹289.50 के एडजस्टेड प्राइस पर शुरू हुई थी। शेयर की एडजस्टेड कीमत का पता लगाने के लिए NSE और BSE पर एक स्पेशल प्री-ओपनिंग सेशन हुआ।

Vedanta से अलग होने वाले चारों कारोबारों पर अनिल अग्रवाल की राय


एल्युमीनियम बिजनेस

अनिल अग्रवाल के मुताबिक, कंपनी अभी हर साल 30 लाख टन एल्युमीनियम बनाती है और अगले तीन सालों में इसका लक्ष्य 60 लाख टन एल्युमीनियम का उत्पादन करना है। यह प्राइवेट सेक्टर में दुनिया की सबसे बड़ी एल्युमीनियम कंपनी बन जाएगी। ग्रुप की योजना एक इंडस्ट्रियल पार्क मॉडल के जरिए 1,000 डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज विकसित करने की भी है।

तेल और गैस कारोबार

अग्रवाल का कहना है कि वेदांता की योजना अगले तीन से पांच सालों में 500,000 बैरल प्रतिदिन का तेल उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की है। इसके लिए कंपनी 5 अरब डॉलर का निवेश करेगी। ग्रुप की हाइड्रोकार्बन संपत्तियों में टाइट ऑयल, शेल गैस, उथले पानी के क्षेत्र, गहरे पानी के क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत का एक ब्लॉक शामिल है।

पावर बिजनेस

वेदांता का पावर बिजनेस अभी 4,000 मेगावाट बिजली बना रहा है। लक्ष्य 20,000 मेगावाट तक पहुंचना है। यह सारा विस्तार ब्राउनफील्ड एक्सपेंशन यानि कि मौजूदा प्लांट में विस्तार के जरिए किया जाएगा। अग्रवाल के मुताबिक, पावर सेक्टर की कंपनी के पास कोयले की पूरी सप्लाई (लिंकेज) मौजूद है।

स्टील एंड आयरन बिजनेस

अग्रवाल ने बताया कि ग्रुप अभी कुल 40 लाख टन स्टील का उत्पादन करता है, जिसमें से 30 लाख टन इसके मुख्य प्लांट में और 10 लाख टन गोवा में बनता है। लक्ष्य 1.5 करोड़ टन ग्रीन, इलेक्ट्रिकल या स्पेशल स्टील का उत्पादन करना है। इस बड़े पैमाने के उत्पादन को संभव बनाने के लिए कंपनी के पास अपने खुद के लौह अयस्क (आयरन ओर) और कोक की सप्लाई मौजूद है।

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पूंजीगत खर्च और कमाई

अग्रवाल के मुताबिक, वेदांता ग्रुप की योजना इन सभी कारोबारों में कुल 20 अरब डॉलर का निवेश करने की है। इसके लिए मुख्य रूप से कंपनी की अपनी कमाई (आंतरिक स्रोतों) से ही फंड जुटाया जाएगा। उन्होंने ग्रुप का EBITDA लगभग 10 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान जताया है। कहा है कि फंड कभी भी आड़े नहीं आएगा।

Vedanta के शेयरहोल्डर्स के लिए क्या बदलेगा?

कंपनी ने डीमर्जर के लिए शुक्रवार, 1 मई को रिकॉर्ड डेट तय किया था। रिकॉर्ड डेट तक जिन लोगों के नाम वेदांता के शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डीमर्जर से निकलने वाली 4 और कंपनियों में शेयर पाने के हकदार होंगे।

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