Aluminium Stocks: 16 जून को वेदांता एल्युमीनियम,हिंडाल्को और नालको के शेयरों में 5% तक की गिरावट आई है। एल्युमीनियम की कीमतें दो महीने से ज्यादा के निचले स्तर पर आ गईं है। इस असर इन शेयरों पर देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम शांति समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ज़रिए मेटल की शिपिंग फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज पर एल्युमीनियम की कीमतें 4.4 फीसदी गिरकर 3,379.50 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गईं है। यह इसका 27 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है।
मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान बीच एक शांति समझौते पर सहमति बनी है। इसके तहत शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। इस योजना की बारीकियों पर अभी बातचीत चल रही है।
ईरान युद्ध के कारण मेटल की सप्लाई में भारी कमी आई थी। इस युद्ध के दौरान हुए मिसाइल हमलों में मध्य पूर्व के एल्युमीनियम स्मेल्टरों को निशाना बनाया गया और एक अहम जलमार्ग के बंद होने से कच्चे माल की आवक और तैयार मेटल की निकासी रुक गई थी।
हालांकि एल्युमीनियम बनाने वाली कंपनियों ने प्लांट चालू रखने के लिए लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ उपाय किए,लेकिन युद्ध के कारण इंडस्ट्री को सप्लाई की भारी कमी का सामना करना पड़ा। 16 जून को सुबह 10 बजे के आसपास निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.5% गिरकर 12,883.45 पर ट्रेड कर रहा था। वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस और नालको में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही ती। इनके शेयरों में 5% तक की गिरावट देखने को मिल रही थी।
16 जून को हिंडाल्को के शेयरों में लगभग 4% की गिरावट आई है और यह निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा है।
बैंक ऑफ अमेरिका के एनालिस्ट्स (जिनमें माइकल विडमर भी शामिल हैं) ने एक नोट में कहा है कि आने वाले समय में एल्युमीनियम की कीमतें और गिर सकती हैं क्योंकि सप्लाई से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं,लेकिन मांग को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। एनालिस्ट्स का यह भी कहना है कि हालांकि अप्रैल में मिडिल ईस्ट (जिसकी ग्लोबल सप्लाई का लगभग 10% हिस्सेदारी है) से होने वाले प्रोडक्शन में सालाना आधार पर 35% की गिरावट आई,लेकिन इस कमी की भरपाई आंशिक रूप से चीन में बढ़ते प्रोडक्शन से हो सकती है,क्योंकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमीनियम प्रोड्यूसर है।
एनालिस्ट्स का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने पर मध्य पूर्व में जमा एल्युमीनियम स्टॉक बाजार में आ सकता है। साथ ही इंडोनेशिया में स्मेल्टर्स से सप्लाई बढ़ सकती है। इससे भी एल्युमीनियम की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
एक्सिस सिक्योरिटीज की राय
एक्सिस सिक्योरिटीज का कहना है कि एल्युमीनियम की कीमतों के 2,500 डॉलर प्रति टन से नीचे के पुराने स्तरों पर लौटने की संभावना कम है। शॉर्ट-टर्म (2026-2027) में होर्मुज से सप्लाई में कमी और भारी फिजिकल बैकवर्डेशन के कारण कीमतें 3,000-3,800 डॉलर प्रति टन की ऊंची रेंज में रहेंगी। लॉन्ग-टर्म (2028-2030) में यह 2,800-3,000 डॉलर प्रति टन पर स्ट्रक्चरल इक्विलिब्रियम फ्लोर (संतुलन का निचला स्तर)पर रहेंगी। यह 'इंसेंटिव प्राइस'इंडोनेशिया में किए गए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) की भरपाई करने और नियमों के मुताबिक (ग्रीन)बिजली की बढ़ती मार्जिनल कॉस्ट को कवर करने के लिए जरूरी है। एक्सिस सिक्योरिटीज ने हिंडाल्को और NALCO पर अपनी 'BUY' रेटिंग और Q4FY26 के नतीजों के लिए तय टारगेट को बरकरार रखा है।
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