Auto Stocks: ऑटो कंपनियों के लिए कैसा रहेगा अक्टूबर का महीना, क्या त्योहारी सीजन में इस सेक्टर की रौनक लौटेगी?

पहली तिमाहीऑटो कंपनियों के लिए अच्छी नहीं थी। इसकी वजह लोकसभा चुनावों और गर्मी के मौसम को माना गया। जुलाई और अगस्त में भी कई सेगमेंट में ऑटो की मांग कमजोर रही। सितंबर में श्राद्ध पक्ष का असर ऑटो की बिक्री पर देखने को मिला

अपडेटेड Oct 03, 2024 पर 1:21 PM
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कंजम्प्शन के डेटा बताते हैं कि शहरों में गुड्स एंड सर्विसेज का कंजम्प्शन बढ़ रहा है। लेकिन, लोग कंज्यूमर गुड्स और व्हीकल्स जैसी प्रीमियम कैटेगरी की खरीदारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

ऑटो कंपनियों के लिए अक्टूबर का महीना काफी अहम है। दरअसल, अक्टूबर त्योहारों का महीना है। नवरात्र के दौरान स्कूटर, मोटरसाइकिल, कारों की बिक्री ज्यादा रहती है। इंडिया खासकर देश के उत्तरी राज्यों में नवरात्र को गाड़ी खरीदने के लिए शुभ माना जाता है। सवाल है कि इस बार अक्टूबर ऑटो कंपनियों के लिए कैसा रहेगा? पिछले कुछ समय से पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल्स की डिमांड में सुस्ती दिखी है। पहली तिमाही भी ऑटो कंपनियों के लिए अच्छी नहीं थी। इसकी वजह लोकसभा चुनावों और गर्मी के मौसम को माना गया।

पिछले कई महीनों में सुस्ती रही है बिक्री

जुलाई और अगस्त में भी कई सेगमेंट में ऑटो की मांग कमजोर रही। सितंबर में ओणम और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े त्योहारों के बावजूद बिक्री सुस्त रही। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सितंबर में 'श्राद्ध पक्ष' की वजह से लोगों ने गाड़ियां नहीं खरीदी। श्राद्ध पक्ष को स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार और कमर्शियल व्हीकल्स खरीदने के लिए शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में कंपनियों को अक्टूबर से काफी उम्मीदें हैं। त्योहार के दौरान आम तौर पर कंपनियां गाड़ियों के नए मॉडल्स लॉन्च करती हैं।


नवरात्र-दिवाली में बढ़ती है गाड़ियों की सेल्स

एनालिस्ट का कहना है कि ऑटो कंपनियों को दशहरा और दिवाली के दौरान गाड़ियों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इस साल दिवाली 31 अक्टूबर या 1 नवंबर को मनाई जाएगी। इसका मतलब है कि त्योहारों के दौरान होने वाली खरीदारी अक्टूबर में होगी। ऑटो कंपनियां कार और एसयूवी में डिस्काउंट्स ऑफर कर रही हैं। उधर, व्हीकल्स की कॉस्ट बढ़ी है।

कंपनियों के लिए बढ़ी है गाड़ियों की कॉस्ट

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में मारुति के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है कि नए नियमों की वजह से गाड़ियों की कॉस्ट काफी बढ़ गई है। उसके हिसाब से लोगों की मंथली इनकम नहीं बढ़ी है। इसका असर लोगों के कार खरीदने के प्लान पर पड़ रहा है। इसके अलावा कोविड के बाद गाड़ियों की बिक्री में अचानक जो तेजी दिखी थी, वह अब खत्म होती दिख रही है।

बिक्री में उछाल की उम्मीद नहीं

कंजम्प्शन के डेटा बताते हैं कि शहरों में गुड्स एंड सर्विसेज का कंजम्प्शन बढ़ रहा है। लेकिन, लोग कंज्यूमर गुड्स और व्हीकल्स जैसी प्रीमियम कैटेगरी की खरीदारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उधर, मानसून की अच्छी बारिश से ग्रामीण इलाकों में डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन, कुछ राज्यों में आई बाढ़ का असर ऑटो कंपनियों की बिक्री पर पड़ सकता है। अगर इनफ्लेशन में कमी के बाद आरबीआई इंटरेस्ट रेट घटाता है तो भी डिमांड पर इसका असर दिखने में थोड़ा वक्त लगेगा। ऐसे में अक्टूबर का महीना भी ऑटो सेक्टर के लिए बहुत अच्छा रहने की उम्मीद कम दिखती है।

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मिलाजुला रहा है ऑटो स्टॉक्स का प्रदर्शन

बीते 6 महीनों में ऑटो स्टॉक्स का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है। Maruti Suzuki के शेयर ने पिछले छह महीनों में सिर्फ 4.63 फीसदी रिटर्न दिया है। Eicher Motors का शेयर पिछले 6 महीनों में 23 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान Tata Motors का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा गिरा है। Hero MotoCorp का शेयर बीते 6 महीनों में 25 फीसदी चढ़ा है। टीवीएस मोटर का शेयर इस दौरान 32 फीसदी उछला है।

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