ऑटोमेटेड एक्सेसरीज बनाने वाली ऑटोफर्निश की 29 मई को शेयर बाजार में लिस्टिंग तो प्रीमियम में हुई लेकिन फिर तुरंत आई गिरावट के चलते शेयर ने पूरी बढ़त गंवा दी। शेयर BSE SME पर लगभग 5 प्रतिशत बढ़त के साथ 43 रुपये पर लिस्ट हुए। IPO प्राइस 41 रुपये था। इसके बाद इसमें लिस्टिंग प्राइस से 5 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत 40.85 रुपये के लोअर सर्किट तक चली गई।
कंपनी का 14.60 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू 21 मई को खुला था और 25 मई को बंद हुआ। इसे कुल 1.21 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 1.17 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा भी 1.17 गुना भरा।
ऑटोफर्निश मुख्य रूप से B2B यानि कि बिजनेस टू बिजनेस सेगमेंट में काम करती है। इसका मुख्य फोकस कारों और टूव्हीलर्स के लिए बॉडी कवर और फुट मैट जैसी ऑटोमोबाइल एक्सेसरीज की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, मार्केटिंग और बिक्री पर है। इसके प्रोडक्ट्स “Autofurnish” और “Mototrance” ब्रांड के तहत बेचे जाते हैं। कंपनी के प्रमोटर पुनीत अरोड़ा और रूपल वाधवा हैं।
IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल
Autofurnish अपने पब्लिक इश्यू से हासिल पैसों का इस्तेमाल नई मशीनरी खरीदने के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए, सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए और पब्लिक इश्यू पर आए खर्च की भरपाई करने के लिए करेगी।
Autofurnish की वित्तीय सेहत
अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी की कुल इनकम 28.32 करोड़ रुपये रही। इस बीच शुद्ध मुनाफा 2.83 करोड़ रुपये और EBITDA 4.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वित्त वर्ष 2025 के दौरान केुल इनकम 33.88 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 3.50 करोड़ रुपये और EBITDA 5.11 करोड़ रुपये रहा।
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