Bitcoin Crash: दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन हालिया ऊंचाई से 45 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुकी है। इस गिरावट में सैकड़ों अरब डॉलर की वैल्यू साफ हो गई। इससे रिटेल निवेशकों का भरोसा हिला है।
Bitcoin Crash: दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन हालिया ऊंचाई से 45 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुकी है। इस गिरावट में सैकड़ों अरब डॉलर की वैल्यू साफ हो गई। इससे रिटेल निवेशकों का भरोसा हिला है।
लेकिन असली चिंता सिर्फ बिटकॉइन की कीमत गिरना नहीं है, बल्कि यह है कि इस बार गिरावट के बाद उछाल वाला पुराना चक्र दिखाई नहीं दे रहा। आमतौर पर गिरावट पर खरीदार लौटते हैं, नई कहानी बनती है और मोमेंटम फिर से बनता है। इस बार ऐसा नहीं हुआ है।
इस बार बिटकॉइन में गिरावट के बाद खरीद क्यों लौट रहे हैं, इसे आगे समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि किन 5 बड़े कारणों से बिटकॉइन क्रैश हुआ है।
1. ETF में सुस्ती और स्पॉट डिमांड कमजोर
बिटकॉइन हाल के ऊंचे स्तर के पास टिक नहीं पा रहा है। पहले जिस तरह स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा था, वह रफ्तार अब कम हो गई है। नए निवेशकों का उत्साह घटा है और कई निवेशक जोखिम कम करने के लिए स्टेबलकॉइन या दूसरे सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। जब नई खरीद कम होती है तो कीमत पर दबाव बढ़ता है।

2. रेगुलेटरी अनिश्चितता
क्रिप्टो सेक्टर में नियमों को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है, खासकर भारत जैसे बड़े देशों में। कुछ प्रस्तावित कानूनों और नियामक ढांचे पर देरी हो रही है। इस वजह से बड़े निवेशक और संस्थागत फंड सतर्क रुख अपना रहे हैं। जब नियमों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार में भरोसा कमजोर पड़ता है और बिकवाली बढ़ जाती है।
3. वैश्विक आर्थिक माहौल और जोखिम से दूरी
दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। ब्याज दरों, डॉलर की चाल, भू राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता का असर क्रिप्टो पर भी पड़ता है। जब निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बनाते हैं तो बिटकॉइन जैसी हाई वोलैटिलिटी एसेट सबसे पहले दबाव में आती है।
4. लीवरेज ट्रेडिंग और जबरन लिक्विडेशन
क्रिप्टो बाजार में बड़ी मात्रा में लीवरेज ट्रेडिंग होती है। जब बिटकॉइन किसी अहम सपोर्ट लेवल के नीचे जाता है, तो कई ट्रेडर्स की लीवरेज पोजीशन अपने आप बंद हो जाती हैं। इसे लिक्विडेशन कहते हैं। इससे अचानक भारी बिकवाली होती है और गिरावट और तेज हो जाती है। यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है।
5. कमजोर होता बाजार सेंटिमेंट
पिछली तेज रैली के बाद बाजार में वह उत्साह अब नहीं दिख रहा। कई रिटेल निवेशक ऊंचे स्तर पर खरीदकर नुकसान में हैं। जब भरोसा कमजोर पड़ता है तो लोग गिरावट में खरीदने के बजाय और गिरने के डर से बेचने लगते हैं। इससे रिकवरी का चक्र शुरू नहीं हो पा रहा और कीमत दबाव में बनी हुई है।

डिप पर खरीदारी क्यों नहीं हो रही?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार डिप पर खरीदारी करने वाले निवेशक नजर नहीं आ रहे। जो ताकतें आम तौर पर रिबाउंड को सपोर्ट करती हैं, वे अब उलटा दबाव बना रही हैं। मैक्रो हेज के तौर पर सोना मजबूत दिख रहा है और निवेश उसी ओर जा रहा है।
Acadian Asset Management के पोर्टफोलियो मैनेजर ओवेन लैमोंट ने कहा, 'बिटकॉइन की पूरी कहानी यही थी कि कीमत ऊपर जाती रहेगी। अब कहानी उलटी है। कीमत नीचे जा रही है और यह निवेशकों को आकर्षित नहीं करती।'
भरोसे पर टिकी वैल्यू अब सवालों में
शेयर या कमोडिटी के उलट, बिटकॉइन के पास पारंपरिक फंडामेंटल आधार नहीं है। इसकी वैल्यू काफी हद तक भरोसे और उस कहानी पर टिकी रहती है जो नए खरीदारों को बाजार में लाती है। अब वही कहानी कमजोर पड़ रही है। हालिया तेजी में खरीदने वाले कई रिटेल निवेशक इस समय नुकसान में बैठे हैं।
अब कहां जा रहे बिटकॉइन निवेशक?
क्रिप्टो से ध्यान हटाकर अब कुछ नए सट्टा प्लेटफॉर्म निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। नोएल एचेसन Crypto is Macro Now न्यूजलैटर लिखती हैं। वह कहती हैं कि प्रिडिक्शन मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज जैसे विकल्प क्रिप्टो बाजार से ध्यान खींच रहे हैं। उनके मुताबिक जब बिटकॉइन को मैक्रो एसेट माना जाने लगा, तो उसे कई अन्य एसेट क्लास से मुकाबला करना पड़ रहा है, जो समझने और समझाने में आसान हैं।

स्टेबलकॉइन की बढ़ती भूमिका
इसी दौरान स्टेबलकॉइन पेमेंट सिस्टम और रेगुलेटरी चर्चाओं में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बिटकॉइन के कुछ पुराने कॉरपोरेट समर्थक भी अब स्टेबलकॉइन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। Securitize के को-फाउंडर और सीईओ कार्लोस डोमिंगो ने कहा, 'स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल भुगतान के लिए होता है। आज शायद ही कोई बिटकॉइन को पेमेंट के रूप में देखता है।'
फाइनेंशियलाइजेशन का उलटा असर
रिपोर्ट में एक और पहलू को 'फाइनेंशियलाइजेशन ट्रैप' कहा गया है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और संस्थागत ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के पूरी उम्मीद थी कि बिटकॉइन को ज्यादा वैधता मिलेगी। लेकिन इससे वह वॉल स्ट्रीट के अन्य वित्तीय साधनों जैसा बन गया है, जहां भारी ट्रेडिंग और डेरिवेटिव्स से जुड़ाव ने जोखिम बढ़ा दिया है।
ऑफशोर डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म पर ऊंचे लीवरेज के कारण ऑटोमेटेड लिक्विडेशन होते हैं, जो कीमतों में तेज गिरावट ला सकते हैं। इसका असर स्पॉट ETF निवेशकों पर भी पड़ता है।
मैक्रो कहानी भी कमजोर
भू राजनीतिक तनाव और डॉलर की कमजोरी के बावजूद सोना और चांदी में तेजी आई है, जबकि क्रिप्टो कीमतें गिरी हैं। पिछले तीन महीनों में अमेरिकी सूचीबद्ध गोल्ड ETF में 16 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आया, जबकि स्पॉट बिटकॉइन ETF से करीब 3.3 अरब डॉलर की निकासी हुई। बिटकॉइन का बाजार पूंजीकरण 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा घट चुका है।
Sevens Report के अध्यक्ष टॉम एसे का कहना है, 'लोग समझ रहे हैं कि बिटकॉइन एक सट्टा एसेट ही है। यह न डिजिटल गोल्ड है, न महंगाई से बचाव का मजबूत साधन, और न ही अस्थिरता से सुरक्षा देता है। इसके मुकाबले अन्य बेहतर विकल्प मौजूद हैं।'
सट्टा कल्चर में भी हो रहा बदलाव
सट्टा कल्चर भी बदल रहा है। Polymarket और Kalshi जैसे प्लेटफॉर्म उन निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं, जो पहले मीम कॉइन की ओर जाते थे।
TMX VettaFi की रॉक्साना इस्लाम कहती हैं कि प्रिडिक्शन मार्केट अब उन्हीं DIY निवेशकों के लिए नया आकर्षण बन रहे हैं जिन्हें क्रिप्टो की सट्टा प्रकृति पसंद थी। इसका मतलब यह हो सकता है कि क्रिप्टो में कुल मिलाकर दिलचस्पी कम हो रही है।
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