एयरटेल-वोडा आइडिया को बड़ी राहत! बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द किया सरकार का एकमुश्त स्पेक्ट्रम चार्ज

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सरकार के वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज को रद्द कर दिया। इस फैसले से टेलीकॉम कंपनियों पर लटकी बड़ी वित्तीय देनदारी का खतरा कम हो गया है।

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 9:06 PM
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि एयरेटल और वोडाफोन आइडिया पर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं था।

भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से लगाए गए वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास यह अधिकार नहीं था कि वह लाइसेंस जारी होने के कई साल बाद उसकी वित्तीय शर्तों को पिछली तारीख से बदल दे।

जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ ने 8 नवंबर और 28 दिसंबर 2012 के उन सरकारी फैसलों को रद्द कर दिया, जिनके तहत जुलाई 2008 से 6.2 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम रखने वाली टेलीकॉम कंपनियों पर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाया गया था।

अदालत ने एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को भेजे गए डिमांड नोटिस भी रद्द कर दिए। साथ ही कंपनियों की ओर से जमा कराई गई बैंक गारंटी वापस करने का आदेश दिया। एयरटेल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे टेलीकॉम सेक्टर में लंबे समय से बनी कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता खत्म होगी और भविष्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।


स्पेक्ट्रम विवाद का पूरा मामला क्या है?

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के 2G स्पेक्ट्रम मामले में दिए गए फैसले के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद दूरसंचार विभाग (DoT) ने फैसला किया कि जिन टेलीकॉम कंपनियों के पास 6.2 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम है, उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा।

सरकार का तर्क था कि स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेज के अलावा स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए भी अलग से भुगतान किया जाना चाहिए।

एयरटेल और वोडा आइडिया ने क्या दलील दी?

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने इस शुल्क को अदालत में चुनौती दी थी। कंपनियों का कहना था कि न तो भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और न ही उनके लाइसेंस समझौतों में ऐसा कोई प्रावधान है, जो सरकार को पिछली तारीख से इस तरह का शुल्क लगाने की अनुमति देता हो।

दोनों कंपनियों ने यह भी कहा कि वे पहले से ही नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी (NTP) 1999 के तहत रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के जरिए भुगतान कर रही थीं। जब भी उन्हें अतिरिक्त स्पेक्ट्रम मिला, तब उन्होंने ज्यादा रेवेन्यू-शेयर शुल्क भी चुकाया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कंपनियों की दलीलों को सही माना। कोर्ट ने कहा कि टेलीग्राफ एक्ट की धारा 4 के तहत दिए गए टेलीकॉम लाइसेंस एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट हैं और सरकार भी उसकी शर्तों से बंधी होती है।

खंडपीठ ने कहा कि जब दोनों पक्ष किसी तय व्यवस्था के तहत आगे बढ़ चुके हों, तो सरकार बीच में नियम बदलकर नई वित्तीय शर्तें नहीं थोप सकती। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार 'मैच शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदल सकती।'

सरकार की जनहित वाली दलील भी नहीं मानी

केंद्र सरकार ने कहा था कि यह शुल्क जनहित में लगाया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ज्यादा राजस्व जुटाना अपने आप में जनहित नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि NTP-1999 का मकसद सस्ती टेलीकॉम सेवाएं उपलब्ध कराना, ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाना और स्पेक्ट्रम का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना था, न कि सिर्फ सरकारी कमाई बढ़ाना।

TRAI की सिफारिशों का भी जिक्र

कोर्ट ने TRAI और विभिन्न सरकारी समितियों की पुरानी सिफारिशों की भी समीक्षा की। अदालत ने कहा कि पहले की सिफारिशों में आम तौर पर 10 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम पर वन-टाइम चार्ज लगाने की बात की गई थी। जबकि एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के मामले में यह सीमा पार नहीं हुई थी।

इसके बावजूद सरकार ने उन पर यह शुल्क लगाने की कोशिश की।

मद्रास हाई कोर्ट के पुराने फैसले से भी असहमति

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2016 में एयरसेल मामले में मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले से भी असहमति जताई, जिसमें इसी तरह के शुल्क को सही माना गया था।

अदालत ने कहा कि अतिरिक्त राजस्व जुटाने को जनहित नहीं माना जा सकता। साथ ही सरकार लाइसेंस की शर्तों में बदलाव किए बिना इस तरह का शुल्क नहीं लगा सकती।

कंपनियों को मिली बड़ी राहत

अंत में हाई कोर्ट ने कहा कि वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं था। इसी वजह से अदालत ने सरकार के फैसलों और उनसे जुड़े सभी डिमांड नोटिस को रद्द कर दिया।

इस फैसले को एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के लिए बड़ी कानूनी और वित्तीय राहत माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन पर लंबे समय से लटकी एक बड़ी देनदारी का खतरा खत्म हो गया है।

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