शेयर बाजार में चौतरफा गिरावट, 52-वीक लो पर पहुंचे BSE के 50% से ज्यादा स्टॉक्स
भारतीय शेयर बाजार में जारी चौतरफा गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच मार्च महीने में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध आधे से ज्यादा शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच गए हैं। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बाजार में फैली हुई है
BSE पर ट्रेड हो रहे 4,270 शेयरों में से 2,234 शेयर मार्च महीने में अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए
भारतीय शेयर बाजार में जारी चौतरफा गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच मार्च महीने में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध आधे से ज्यादा शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच गए हैं। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बाजार में फैली हुई है।
2,234 शेयर 52-वीक लो पर
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, BSE पर सक्रिय रूप से ट्रेड हो रहे 4,270 शेयरों में से करीब 2,234 शेयर मार्च महीने के दौरान अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। यानी करीब 50% से ज्यादा शेयर। इनमें से 445 शेयर ऐसे हैं जो अपने ऑल-टाइम लो लेवल तक फिसल गए। करीब 1,000 शेयर A और B ग्रुप कैटेगरी के हैं, जो आमतौर पर ज्यादा सक्रिय और लिक्विड माने जाते हैं। इससे इस गिरावट की गंभीरता और स्पष्ट होती है।
बाकी शेयर भी दबाव में
बाकी 2,036 शेयरों में भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। इनमें से करीब 16% यानी 334 शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर से सिर्फ 1 से 10% ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। इसके अलावा 414 शेयर 10-20% ऊपर, 294 शेयर 20-30% ऊपर और 356 शेयर 30-50% ऊपर हैं।
करीब 353 शेयर ऐसे हैं जो 50-100% ऊपर हैं, जबकि 285 शेयर 100% से ज्यादा ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि बाजार में कमजोरी का असर लगभग हर स्तर पर देखा जा रहा है।
गिरावट के पीछे बड़े कारण
मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक, इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश पर महंगाई और चालू खाते के घाटे का दबाव बढ़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये की कमजोरी और कॉरपोरेट अर्निंग्स को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार को कमजोर किया है।
निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट
इस गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है। 2024 के उच्च स्तर से अब तक BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹56 लाख करोड़ घट चुका है। हालांकि, प्रमोटर हिस्सेदारी में कमी के कारण मार्केट फ्लोट में 4% की बढ़ोतरी से इस गिरावट का कुछ हिस्सा संतुलित हुआ है।
वैल्यूएशन में सुधार, लेकिन जोखिम बरकरार
हालांकि, इस गिरावट के बाद कई शेयरों के वैल्यूएशन अब उनके लंबे समय के औसत के करीब या उससे नीचे आ गए हैं, जिससे कुछ निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकता है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, मौजूदा माहौल में डिफेंसिव सेक्टर्स जैसे कंज्यूमर स्टेपल्स, टेलीकॉम और डिफेंस में निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है। ब्रोकरेज ने बैंकिंग सेक्टर पर भी पॉजिटिव रुख बनाए रखा है, जहां मजबूत एसेट क्वालिटी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
किन सेक्टर्स से दूरी की सलाह
गोल्डमैन सैक्स ने ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को ‘मार्केट वेट’ किया है, क्योंकि ये सेक्टर महंगाई और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील हैं। इसके अलावा NBFCs, इंडस्ट्रियल्स, केमिकल्स, IT और फार्मा सेक्टर पर भी सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी गई है।
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