मेटल शेयरों में धमाकेदार तेजी देखने को मिली है। 2 सत्रों में NIFTY METAL INDEX करीब 9% उछला। वहीं इस साल 27% उछलकर HINDALCO नए शिखर पर पहुंच गया है। VEDANTA भी 52 हफ्ते की ऊंचाई पर कारोबार कर रहा है। एल्युमिनियम की रिकॉर्ड कीमतों ने भी मेटल इंडेक्स की तेजी में जोश भरा है। इस एल्युमिनियम का भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। जिंक का भाव 16 सालों की ऊंचाई पर जबकि निकेल का भाव 11 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। वहीं कोयले की कीमतें 8 महीनों के ऊंचाई पर कारोबार कर रही हैं।
जंग के बीच भागे बेस मेटल्स
CNBC-AWAAZ की रिपोर्ट के मुताबिक अल्युमिनियम की चाल पर नजर डालें तो एक हफ्ते में इसमें 3.59%, 1 महीने में 11.50% की तेजी नजर आई है। वहीं इस साल अब तक इसमें 23.88% प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है। जिंक की चाल देखें तो एक हफ्ते में इसमें 3.44%, 1 महीने में 2.23% की तेजी नजर आई है। वहीं इस साल अब तक इसमें 6% प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है।
निकेल की चाल पर नजर डालें तो एक हफ्ते में इसमें 3.05%, 1 महीने में 8.75% की तेजी नजर आई है। वहीं इस साल अब तक इसमें 20.94% प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है। कॉपर की चाल देखें तो एक हफ्ते में इसमें 1.91%, 1 महीने में 3.97% की तेजी नजर आई है। वहीं इस साल अब तक इसमें 3.51% प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है।
रूस-यूक्रेन संकट पर कैसी रहेगी स्टील की चाल
JP MORGAN की STEEL पर राय
JP MORGAN ने STEEL पर राय व्यक्त करते हुए कहा कि 2020 में रूस स्टील का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर था जबकि यूक्रेन चौथा बड़ा स्टील एक्सपोर्टर था। इसके आगे चीन में उत्पादन नहीं बढ़ने पर स्टील कीमतें बढ़ेंगी। ग्लोबल स्टील एक्सपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 11% के करीब है। फिलहाल रूस 26.4MT स्टील का एक्सपोर्ट करता है। वहीं यूक्रेन की ग्लोबल स्टील एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी 6% के करीब है। इस संकट से घरेलू और एक्सपोर्ट कीमतें बढ़ने का अनुमान है। हालांकि कीमतें बढ़ने से मार्जिन में सुधार संभव है।
NOMURA ने STEEL पर राय व्यक्त करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन संकट से स्टील एक्सपोर्ट में दिक्कतें संभव हैं। इससे EU के स्टील उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। हालांकि इस दौरान भारतीय कंपनियों के पास एक्सपोर्ट बढ़ाने का मौका भी है। बता दें कि रूस-यूक्रेन की ग्लोबल स्टील एक्सपोर्ट में 11% हिस्सेदारी है। वहीं सप्लाई घटने से कूकिंग कोल कीमतों में तेजी संभव है। दूसरी तरफ कूकिंग कोल कीमतें बढ़ने से भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ेगी।