Brokerage Radar: ब्रोकरेज फर्मों ने आज 19 नवंबर के कारोबार से पहले 3 कंपनियों के शेयरों को लेकर अपनी राय जाहिर की है। इसमें ग्लेनमार्क फार्मा, टाटा ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स और सुजलॉन एनर्जी शामिल है। इसके अलावा विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने फाइनेंशियल सेक्टर को लेकर अपनी राय जाहिर की है। आइए जानते हैं कि ब्रोकरेज इनमें से कौन से शेयरों पर बुलिश हैं और उन्होंने इनके लिए क्या टारगेट प्राइस तय किए हैं-
1. ग्लेनमार्क फार्मा (Glenmark Pharma)
घरेलू ब्रोकरेज फर्म HSBC ने इस शेयर को होल्ड की रेटिंग दी है, लेकिन इसके टारगेट प्राइस को 1,660 रुपये से घटाकर 1,600 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि Q2 के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। हालांकि इस सुस्त तिमाही में भी भारत में बिक्री मजबूत रही। अमेरिका में बिक्री में तेजी के लिए मोनरो प्लांट से नए लॉन्च और सप्लाई जरूरी है। इससे मार्जिन को भी बेहतर करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी सेगमेंट में बेहतर एग्जिक्यूशन की उम्मीद है।
2. इंडियन होटल्स (Indian Hotels)
विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस शेयर को खरीदने की सलाह दी है और इसके लिए 785 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज ने कहा कि टाटा ग्रुप का यह शेयर इस साल अब तक कंपनी के शेयर में 68% की तेजी आ चुकी है और मई 2022 से यह तीन गुना बढ़ चुका है, जब इसने 2025 तक अपने मार्जिन और ब्रांड पोर्टफोलियो लक्ष्य प्रस्तुत किए थे। कंपनी ने 2025 तक तय किए गए मार्जिन और ब्रांड पोर्टफोलियो के लक्ष्य पहले ही पार कर लिया है। मैनेजमेंट ने मार्जिन पर कोई नई गाइडेंस नहीं दी। कंपनी सतत विकास के लिए नई रणनीतियों पर फोकस कर रही है।
3. सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy)
विदेशी ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने इस शेयर को ओवरवेट की रेटिंग दी है और इसके लिए 71 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज ने कहा कि हम शेयर में आई हालिया गिरावट को खरीदारी का मौका मानते हैं। सुजलॉन की बिजनेस क्षमताएं और विंड OEM सेक्टर में ग्रोथ की संभावनाएं दोनों ही मजबूत कारक बने हुए हैं। वित्त वर्ष 25 में इसका सेल्स वॉल्यूम घटकर 1.3 गीगावाट रहने का अनुमान है (पहले 1.5 गीगावाट)। हालांकि वित्त वर्ष 25-27 के दौरान कुल सेल्स वॉल्यूम का अनुमान 7.15 गीगावाट पर बरकरार है।
4. फाइनेंशियल स्टॉक्स (Financials Stocks)
जेफरीज ने कहा कि खुदरा NPL चक्र सीमित रहेगा, खासकर प्रमुख बैंकों के लिए। अनसिक्योर्ड लोन सेगमेंट की ग्रोथ में आई कमी को आंशिल रूप से SME लोन से पूरा किया जा सकता है। बैंक रेट्स/लिक्विडिटी और सेक्टर लोन ग्रोथ पर समान विचार नहीं रखते। जीवन बीमा कंपनियां सरेंडर चार्ज और कैप के असर को संभालने के लिए तैयार दिख रही हैं। अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का आउटलुक भी पॉजिटिव दिख रहा है।
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