Adani को झटका, शॉर्ट-टर्म ASM फ्रेमवर्क में डाला गया Adani Enterprises का शेयर, सर्कुलर जारी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अदाणी ग्रुप की सबसे मुख्य कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) को कुछ अवधि के लिए एडीशनल सर्विलांस मीजर (ASM) फ्रेमवर्क के तहत डालने का फैसला किया है। यह बदलाव गुरुवार 25 मई से जारी होगा। इस कदम का मकसद अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में उतार-चढ़ाव को कम करना है

अपडेटेड May 24, 2023 पर 11:19 PM
Adani Enterprises के शेयर बुधवार को NSE पर 6% गिरकर 2,475 रुपये के भाव पर बंद हुए थे

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अदाणी ग्रुप की सबसे मुख्य कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) को कुछ अवधि के लिए एडीशनल सर्विलांस मीजर (ASM) फ्रेमवर्क के तहत डालने का फैसला किया है। यह बदलाव गुरुवार 25 मई से जारी होगा। इस कदम का मकसद अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में उतार-चढ़ाव को कम करना है। साथ ही अब इन शेयरों पर निगरानी भी बढ़ जाएगी। BSE और NSE दोनों ने बुधवार को अलग-अलग सर्कुलर जारी कर बताया कि अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर को शॉर्ट-टर्म के लिए ASM फ्रेमवर्क के स्टेज-1 लिस्ट में डाला गया है।

एक्सचेंज ने बताया कि शॉर्ट-टर्म ASM के तहत, "मार्जिन की लागू दर 50 प्रतिशत या मौजूदा मार्जिन जो भी अधिक हो, वो होगी। मार्जिन की अधिकतम दर 100 प्रतिशत होगी।" बता दें कि NSE और BSE ने इससे पहले मार्च में अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर को शॉर्ट-टर्म ASM फ्रेमवर्क से बाहर किया था।

ASM फ्रेमवर्क के तहत किसी शेयर का चुनाव भारी उतार-चढ़ाव, क्लाइंट का ज्यादा ध्यान देना, मार्केट कैपिटलाइजेशन/वॉल्यूम में भारी बदलाव, डिलिवरी का प्रतिशत और कारोबार के दौरान छुए हुए प्राइस बैंड की संख्या आदि के आधार पर लिया जाता है।


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अदाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) के शेयर बुधवार को एनएसई पर 6 फीसदी गिरकर 2,475 रुपये के भाव पर बंद हुए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के एक्सपर्ट पैनल के एक बयान के बाद इसमें 3 दिनों में 39% की जोरदार तेजी आई थी। पैनल ने कहा था कि मार्केट रेगुलेटर सेबी को अभी तक अदाणी ग्रुप की कंपनियों की ओर से शेयरो में हेरफेर की कोशिश का कोई सबूत नहीं मिला है।

साल 2018 में आई थी ASM फ्रेमवर्क की व्यवस्था

मार्केट रेगुलेटर सेबी और शेयर बाजारों ने रिस्क में कमी और भारी उतार-चढ़ाव वाले स्टॉक्स की निगरानी के लिए वर्ष 2018 में एएसएम की व्यवस्था पेश की थी। बाजार में ईमानदारी बढ़ाने और इनवेस्टर्स के हितों की रक्षा के लिए यह पहल की गई थी। एएसएम के तहत स्टॉक्स को डालने को एक्सचेंजेस की कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव के प्रति इनवेस्टर्स को वार्निंग भी माना जाता है।

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