Q2 Result के बाद BSE में तेजी, शेयर अभी और भागेगा या आएगी गिरावट? जानिए क्या कहते हैं विदेशी ब्रोकरेज
BSE Share: नतीजों के अगले दिन BSE के शेयर में जोरदार खरीदारी दिखी। अब सवाल है कि आगे कितनी तेजी बाकी है। JPMorgan को और ऊपर जाने की गुंजाइश दिख रही है, तो Bernstein को गिरावट की आशंका है। जानिए दोनों ब्रोकरेज की पूरी राय।
BSE लिमिटेड के शेयर में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 4% की तेजी आई और भाव ₹3,773 पर पहुंच गया। इस उछाल के साथ ये Nifty के टॉप गेनर्स में शामिल हो गया। अब निवेशकों के सामने बड़ा सवाल ये है कि इस शेयर में आगे और कितना दम बाकी है। इस पर दो बड़ी ब्रोकरेज फर्मों की राय एक-दूसरे से बिल्कुल उलट है। JPMorgan को शेयर ₹3,960 तक जाता दिख रहा है, जबकि Bernstein ने ₹3,180 का टारगेट रखा है।
आज 4% की छलांग, Nifty के टॉप गेनर्स में शामिल
गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही BSE के शेयर में खरीदारी शुरू हो गई और कुछ ही देर में भाव ₹3,773 तक पहुंच गया। बाजार ने एक्सचेंज के मुनाफे में 45% की बढ़त और डेरिवेटिव्स कारोबार में मजबूत वापसी के संकेत पर दांव लगाया।
ये शेयर इस साल पहले से ही बाजार से कहीं आगे दौड़ रहा है। 2026 में अब तक BSE का शेयर 41.6% चढ़ चुका है, जबकि इसी दौरान Nifty 50 में 6.9% की गिरावट आई है। यानी जब बाजार दबाव में रहा, तब भी इस शेयर ने निवेशकों की झोली भरी। एक्सचेंज का मार्केट कैप करीब ₹1.52 लाख करोड़ है।
JPMorgan को अभी और कितनी तेजी की उम्मीद
विदेशी ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने BSE पर Overweight रेटिंग बरकरार रखी है और ₹3,960 का टारगेट प्राइस दिया है। JPMorgan के भरोसे की दो बड़ी वजहें हैं, कमाई में तेज ग्रोथ और लगातार सुधरती मुनाफे की क्षमता। ब्रोकरेज के मुताबिक Q2 में BSE का रेवेन्यू सालाना आधार पर 34.1% बढ़ा, हालांकि इक्विटी डेरिवेटिव्स को कई तरफ से झटके लगने की वजह से तिमाही दर तिमाही ये 8.5% घटा।
मुनाफे की क्षमता वाली बात मार्जिन में सबसे साफ दिखती है। EBITDA 43% बढ़कर ₹973 करोड़ रहा और EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 63.7% से बढ़कर 67.9% हो गया। यानी हर ₹100 की कमाई में से ₹67.9 ऑपरेटिंग मुनाफे के तौर पर बच रहे हैं। CDSL की हिस्सेदारी हटाकर देखें तो नेट प्रॉफिट 45.7% बढ़कर ₹783 करोड़ रहा, जिसमें ₹118 करोड़ की बढ़ी हुई अन्य आय ने भी सहारा दिया।
Bernstein को क्यों दिख रही गिरावट?
Bernstein इस तेजी से सहमत नहीं है। उसने टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹3,180 तो किया, लेकिन Underperform रेटिंग नहीं बदली। Bernstein का कहना है कि Q2 के नतीजों में वही दिखा, जिसका अंदाजा पहले से था। यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का असर, डेरिवेटिव्स वॉल्यूम की धीमी ग्रोथ और मार्केट शेयर का मौजूदा ट्रेंड। ब्रोकरेज ने माना कि कमाई अनुमान से बेहतर रही, लेकिन साथ में ये भी कहा कि इस बेहतर प्रदर्शन का एक हिस्सा तिमाही में सेटलमेंट गारंटी फंड (SGF) में कम योगदान की वजह से आया।
Bernstein ने ये माना कि तीसरी तिमाही में बाजार के वॉल्यूम का ट्रेंड और BSE की मार्केट शेयर में बढ़त मजबूत बनी हुई है। उसकी चिंता आगे की है। जब मार्केट शेयर में बढ़त अपने चरम के करीब पहुंचेगी और वैल्यूएशन सामान्य होंगे, तब क्या एक्सचेंज इतनी तेज ग्रोथ बनाए रख पाएगा। तेज ग्रोथ कितने दिन टिकेगी और ऊंचा वैल्यूएशन, यही दो बातें Bernstein को खटक रही हैं।
बुधवार के नतीजों में क्या रहा खास?
तेजी की नींव बुधवार को आए नतीजों में है। 30 सितंबर 2026 को खत्म तिमाही में BSE का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹809 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹558 करोड़ से 45% ज्यादा है। पिछली तिमाही के मुकाबले मुनाफा करीब 7% घटा।
तिमाही दर तिमाही आई इस सुस्ती की जड़ अगस्त में है। उसी महीने बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) शुरू हुआ। इसके बाद दिन के आखिर में शेयरों के भाव में उतार-चढ़ाव बढ़ गया और ट्रेडिंग पर असर पड़ा। डेरिवेटिव्स का औसत रोजाना टर्नओवर, जिसे चुकाए गए प्रीमियम से मापा जाता है, सालाना आधार पर 50% बढ़ा, लेकिन पिछली तिमाही से 24% घट गया।
अक्टूबर का रिकॉर्ड, जिस पर टिकी है आगे की उम्मीद
बाजार को सबसे ज्यादा भरोसा मैनेजमेंट की बातों से मिला है। BSE के MD और CEO सुंदररमन राममूर्ति ने कहा कि बाजार में आए स्ट्रक्चरल बदलावों से पैदा हुई अनिश्चितता ने कुछ समय के लिए ट्रेडिंग पर असर डाला, लेकिन ये रुकावट अब पीछे छूट चुकी है। उन्होंने कहा, "बाजार में जो स्ट्रक्चरल बदलाव लाए गए और जो अनिश्चितताएं थीं, उनकी वजह से लोग रुककर बैठ गए और कारोबार में सुस्ती आ गई।"
अक्टूबर में क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था को आंशिक रूप से वापस लिया गया और इसके बाद डेरिवेटिव्स कारोबार में फिर से जान लौट आई। राममूर्ति ने कहा, "हमने सितंबर 2026 में निर्णायक रिकवरी देखी और अक्टूबर 2026 रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा, जिसमें हमारा अब तक का सबसे ज्यादा मासिक इंडेक्स ऑप्शंस प्रीमियम एवरेज डेली टर्नओवर वॉल्यूम दर्ज हुआ।" Q2 की सुस्ती अब पुरानी बात है और बाजार की नजर अक्टूबर के इसी रिकॉर्ड पर है, जो अगली तिमाही की तस्वीर तय करेगा।
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