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Budget Stocks: बजट के बाद वापसी करेंगे ये धराशायी शेयर? इन बड़े ऐलानों से भर सकते हैं तेज उड़ान

Budget Stocks: क्या बजट के बाद कंजम्प्शन शेयरों में फिर से तेजी आएगी? शेयर बाजार से जुड़े लोगों की खासतौर से इस पर नजरें होंगी क्योंकि बाजार में आई इस हालिया गिरावट के पीछे कंज्म्पशन ग्रोथ में सुस्ती को एक अहम कारण माना जा रहा है। कंपनियों के प्रदर्शन और तिमाही नतीजों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jan 23, 2025 पर 6:43 PM
Budget Stocks: बजट के बाद वापसी करेंगे ये धराशायी शेयर? इन बड़े ऐलानों से भर सकते हैं तेज उड़ान
Budget Stocks: क्या बजट के बाद कंजम्प्शन शेयरों में फिर से तेजी आएगी?

Budget Stocks: क्या बजट के बाद कंजम्प्शन शेयरों में फिर से तेजी आएगी? शेयर बाजार से जुड़े लोगों की खासतौर से इस पर नजरें होंगी क्योंकि बाजार में आई इस हालिया गिरावट के पीछे कंज्म्पशन ग्रोथ में सुस्ती को एक अहम कारण माना जा रहा है। कंपनियों के प्रदर्शन और तिमाही नतीजों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। कमजोर डिमांड की वजह से इन कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ सिंगल डिजिट में आ गई है।

इसके चलते पिछले एक साल में कंजम्प्शन स्टॉक्स में गिरावट देखी गई है। अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह बजट में इस बार खपत को बढ़ाने के लिए कुछ बड़े उपाय करें। क्या इस बार कुछ ऐसा हो सकता है?

कोरोना महामारी के बाद से सरकार ने खपत बढ़ाने के लिए अपना खर्च बढ़ाने के साथ ही फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रण में रखने की पॉलिसी अपनाई थी। लेकिन टैक्स में राहत जैसी खपत को सीधे बढ़ावा देने वाली नीतियां अब तक नहीं अपनाई गई हैं। अब केंद्र सरकार के सामने चुनौती है वह अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर को संतुलित रखने के साथ ही खपत को बढ़ावा दे।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट में प्राथमिकता खपत पर नहीं बल्कि रोजगार और आय के साधन बढ़ाने पर हो सकती है, जिससे खपत में धीरे-धीरे सुधार आएगा। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण मांग कमजोर रही, लेकिन 2024 के अच्छे मॉनसून ने तस्वीर बदल दी। दोपहिया वाहन, खाद और ट्रैक्टर की मांग में बढ़ोतरी हुई। ग्रामीण इलाकों में ग्रीनशूट्स दिखने लगे हैं। लेकिन पिछले साल की दूसरी छमाही से शहरी इलाकों में मांग सुस्त होने लगी है। खासकर मेट्रो शहरों में। ऊंची महंगाई दर, अनसेक्योर्ड लोन की कमी और सरकारी पूंजीगत खर्च में सुस्ती के चलते शहरी इलाकों में मांग कमजोर हुई है।

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