Banking stocks : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने के बाद, ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टरों में ज़बरदस्त उछाल आया है। बाज़ारों को अमेरिका-ईरान युद्ध के सीजफायर के संकेतों से भी सपोर्ट मिल रहा है। बुधवार के ट्रेडिंग सेशन में,भारतीय रिज़र्व बैंक के फैसले से पहले बैंकिंग शेयरों में 5 फीसदी तक की तेजी आई थी। यह तेजी US-ईरान संघर्ष-विराम वार्ता के आगे बढ़ने के खबरों के चलते आई थी। आरबीआई से आई दरों में बढ़त न करने की खबर ने इस तेजी को और बढ़ा दिया।
निफ्टी बैंक इंडेक्स इंट्रा-डे में 5.3 फीसदी तक भागा है। इस इंडेक्स के सभी स्टॉक्स पॉज़िटिव जोन में ट्रेड कर रहे हैं। AU स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे ज़्यादा फायदे में रहने वाला शेयर है। यह शेयर 8 फीसदी से ज्यादा भागा है। उसके बाद यूनियन बैंक का नंबर है जो 7 फीसदी से ज़्यादा चढ़ा है। इसी तरह IndusInd Bank, Bank of Baroda, Axis Bank, Canara Bank, IDFC First Bank, Punjab National Bank, ICICI Bank, HDFC Bank और YES Bank में भी 5-7 फीसदी की तेजी देखने को मिल रहीहै। । वहीं, SBI, Kotak Bank और Federal Bank भी 3.5 फीसदी से ज़्यादा भागे हैं।
इस बीच,निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ इंडेक्स में भी आज 5.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। इस इंडेक्स में श्रीराम फाइनेंस सबसे ज़्यादा फायदे में दिख रहा है। इसमें 11 फीसदी की बढ़त हुई। इसके बाद चोला फाइनेंस का नंबर है जिसमें 9 फीसदी की बढ़त हुई है। वहीं,मैक्स फाइनेंस,बजाज फाइनेंस,बजाज फिनसर्व और मुथूट फाइनेंस में से हर एक में 7 फीसदी से ज़्यादा की बढ़त हुई। SBI कार्ड्स,Jio फाइनेंशियल,SBI Life और REC में भी 3.5 से 5 फीसदी के बीच बढ़त देखने को मिली है।
पश्चिम एशिया में 2 हफ़्ते के सीज़फ़ायर और उसके चलते ब्रेंट क्रूड की क़ीमतों में आई भारी गिरावट को ध्यान में रखते हुए RBI गवर्नर ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के संदेश में काफ़ी आशावादी लेकिन सतर्क रखे हैं। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और पॉलिसी का रुख न्यूट्रल रखा गया है। यह बाजार की उम्मीद के मुताबिक़ ही है। FY27 के लिए GDP ग्रोथ रेट का 6.9 फीसदी और क्रेडिट ग्रोथ का लगभग 14 फीसदी रहने का अनुमान भी स्टॉक मार्केट और ख़ास तौर पर फ़ाइनेंशियल शेयरों के लिए एक अच्छा संकेत है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी.के विजयकुमार का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये में सुधार से FPI की निकासी का सिलसिला थमने की संभावना है। DIIs और खुदरा निवेशकों की ज़ोरदार खरीदारी से निकट भविष्य में बाज़ार मज़बूत बना रहेगा।
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