विदेशी निवेशकों को टैक्स में बड़ी राहत की तैयारी, कैबिनेट ने अध्यादेश को दी मंजूरी! जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान

Ease Tax Rules FPI: रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की ओर से पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को कुछ खास कैटेगरीज की सिक्योरिटीज में टैक्स राहत देना है। इस खबर के आते ही कल, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में निचले स्तरों से एक बड़ी रिकवरी देखने को मिली थी

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 9:13 AM
पॉलिसी मेकर्स के लिए इस वक्त रुपये में एतिहासिक गिरावट और पर विदेशी निवेशकों का पलायन सबसे बड़ा संकट बना हुआ है

FPI Tax Rules: भारतीय शेयर बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव और लगातार कमजोर होते रुपये को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए टैक्स नियमों को आसान बनाने वाले एक विशेष अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई है।

यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की ओर से पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को कुछ खास कैटेगरीज की सिक्योरिटीज में टैक्स राहत देना है। इस बड़ी खबर के आते ही कल, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में निचले स्तरों से एक बड़ी रिकवरी देखने को मिली। हालांकि, बाजार में यह अनुमान भी लगाया जा रहा था कि कल कैबिनेट मीटिंग के ठीक बाद सरकार की तरफ से इसका आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

क्यों पड़ी इस इमरजेंसी अध्यादेश की जरूरत?


पॉलिसी मेकर्स और सरकार के लिए इस वक्त दो मोर्चों पर सबसे बड़ा संकट बना हुआ है:

रुपये में एतिहासिक गिरावट: मिडिल ईस्ट संकट की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 6 फीसदी तक कमजोर हो चुका है।

विदेशी निवेशकों का पलायन: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस साल जनवरी से अब तक भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड ₹2.25 लाख करोड़ की भारी-भरकम रकम निकाल ली है।

इसी चौतरफा दबाव और FPIs की लगातार बिकवाली को रोकने के लिए सरकार को बजट से पहले ही इस अध्यादेश के जरिए टैक्स नियमों में ढील देने का रास्ता चुनना पड़ा है।

विदेशी निवेशकों की क्या थीं शिकायतें और मांगें?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत सरकार ने लॉन्ग-टर्म (LTCG) और शॉर्ट-टर्म (STCG) कैपिटल गेन्स टैक्स में बढ़ोतरी की है, और साथ ही सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी वसूला जा रहा है। FPIs का मानना था कि डबल टैक्स की इस व्यवस्था के कारण भारत में निवेश करना अब फायदेमंद नहीं रह गया था। मौजूदा समय में विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड्स से होने वाली ब्याज आय पर 20 फीसदी का विद्होल्डिंग टैक्स (TDS) देना पड़ता है।

आपको बता दें कि 1 जुलाई 2023 तक सरकारी सिक्योरिटीज, स्टेट डेवलपमेंट लोन्स और रुपये वाले बॉन्ड्स पर यह टैक्स रेट सिर्फ 5 फीसदी था, जिसे बाद में बढ़ाकर 20% कर दिया गया था। FPI प्रतिनिधि लगातार इस ऊंचे टैक्स रेट और कैपिटल गेन्स टैक्स की समीक्षा करने की मांग कर रहे थे।

कल बाजार में दिखी रिकवरी, अब शुक्रवार को RBI पर टिकी नजरें

इस टैक्स रिलीफ की खबर आने के बाद कल शेयर बाजार के सेंटीमेंट पूरी तरह बदल गए और बाजार निचले स्तरों से जबरदस्त तरीके से रिकवर होकर बंद हुआ। हालांकि सरकार ने कल कैबिनेट के बाद तुरंत कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ मिलकर उठाए जा रहे एक बड़े कूटनीतिक एक्शन का हिस्सा है।

आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है और शुक्रवार को केंद्रीय बैंक कई बड़े उपायों का ऐलान कर सकता है, जिससे रुपये की सेहत सुधारी जा सके और विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीता जा सके।

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार के अन्य बड़े कदम

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध और वैश्विक संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सिर्फ टैक्स राहत ही नहीं, बल्कि कई अन्य मोर्चों पर भी काम कर रही है:

कारोबारियों के लिए क्रेडिट लाइन: कंपनियों और बिजनेस को बनाए रखने के लिए सरकार की गारंटी वाली लोन सुविधा दी जा रही है।

एक्सपोर्टर्स के लिए पैकेज: निर्यात करने वाले कारोबारियों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज का इंतजाम किया गया है।

ईंधन पर ड्यूटी में बदलाव: आम जनता और इंडस्ट्री को महंगाई के झटके से बचाने के लिए फ्यूल पर लगने वाली ड्यूटी में भी जरूरत के हिसाब से एडजस्टमेंट किए जा रहे हैं।

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