Recycled Gold: गोल्ड नहीं खरीदने की अपील के बीच रिसाइकल गोल्ड पर क्या लगा सकते हैं दांव? इसका कॉन्सेप्ट और कीमत भी जान लीजिए

Recycled Gold: पीएम मोदी की गोल्ड खरीद कम करने की अपील के बाद रिसाइकल गोल्ड चर्चा में है। पुराने गहनों और स्क्रैप से तैयार यह गोल्ड आयात बोझ कम कर सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में भारत में रिसाइकल गोल्ड की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

अपडेटेड May 12, 2026 पर 6:37 PM
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रिसाइकल गोल्ड से बने गहने नए इंपोर्टेड गोल्ड वाले गहनों की तुलना में थोड़े सस्ते हो सकते हैं।

Recycled Gold: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल तक गोल्ड खरीदना बंद करने की अपील की है। इसका मकसद सोने का आयात कम करना और विदेशी मुद्रा बचाना है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर नया सोना कम खरीदना है, तो क्या रिसाइकल गोल्ड बेहतर विकल्प बन सकता है?

दरअसल, भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शुमार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का सोने का आयात वित्त वर्ष 2025 में 58 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 72 अरब डॉलर हो गया। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और डॉलर के भंडार पर दबाव आता है।

यही वजह है कि अब सरकार और इंडस्ट्री दोनों पुराने गोल्ड के दोबारा इस्तेमाल यानी रिसाइकल गोल्ड को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। आइए इसकी कीमत से लेकर डिमांड तक के बारे में विस्तार से जानते हैं।


क्या होता है रिसाइकल गोल्ड

रिसाइकल गोल्ड का मतलब ऐसा सोना है, जिसे पुराने गहनों, टूटे जेवर, गोल्ड स्क्रैप, पुराने सिक्कों या इंडस्ट्रियल वेस्ट से निकालकर दोबारा शुद्ध किया जाता है। इस प्रक्रिया में पुराने सोने को रिफाइनिंग प्लांट में भेजा जाता है। वहां उसे पिघलाकर उसकी अशुद्धियां हटाई जाती हैं।

इसके बाद वही गोल्ड फिर से नए गहनों, गोल्ड बार या दूसरे इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है। यानी रिसाइकल गोल्ड कोई नकली या कम गुणवत्ता वाला सोना नहीं होता। रिफाइनिंग के बाद इसकी शुद्धता नए आयातित सोने जैसी ही हो सकती है।

भारत में कितना बड़ा है यह बाजार

भारत के घरों में करीब 30,000 टन से ज्यादा सोना मौजूद होने का अनुमान है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा निजी गोल्ड स्टॉक माना जाता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस सोने का छोटा हिस्सा भी रिसाइकल होकर बाजार में वापस आए, तो भारत को हर साल अरबों डॉलर का आयात बोझ कम कर सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर सिर्फ 1 फीसदी घरेलू सोना भी रिसाइकल होता है, तो करीब 300 टन तक नया गोल्ड इंपोर्ट कम हो सकता है।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि अगर पीएम मोदी की अपील के बाद लोग सोना खरीदना एकदम से बंद करते हैं, तो लाखों लोगों की रोजीरोटी पर संकट आ जाएगा। ऐसे में बीच का रास्ता निकालने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, 'विदेशी मुद्रा बचाने और आजीविका बचाने में से एक चुनने की जरूरत नहीं। सही नीति से दोनों लक्ष्य पूरे हो सकते हैं। जनता को सोना खरीदने से रोकने के बजाय सरकार रेगुलेटेड बुलियन बैंक फ्रेमवर्क सकती है। यह घर, Gold ETFs और संस्थागत होल्डिंग में पड़े सोने को मोबिलाइज कर ज्वेलर्स, मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स तक पहुंचा सकते हैं।'

रिसाइकल गोल्ड की कीमत कैसे तय होती है

रिसाइकल गोल्ड की कीमत उसकी शुद्धता यानी कैरेट और बाजार में चल रहे सोने के भाव पर तय होती है। मान लीजिए आपके पास 22 कैरेट का पुराना गहना है। ज्वेलर पहले उसमें मौजूद असली गोल्ड की मात्रा निकालता है। इसके बाद मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से उसकी कीमत तय की जाती है।

हालांकि इसमें कुछ कटौतियां भी होती हैं, जैसे कि मेल्टिंग चार्ज, रिफाइनिंग फीस, टेस्टिंग चार्ज, मेकिंग चार्ज एडजस्टमेंट। इसी वजह से पुराने गहने बेचने पर बाजार भाव से थोड़ा कम पैसा मिल सकता है।

क्या रिसाइकल गोल्ड सस्ता पड़ता है

कुछ मामलों में रिसाइकल गोल्ड से बने गहने नए इंपोर्टेड गोल्ड वाले गहनों की तुलना में थोड़े सस्ते हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि इसमें नया आयात और लॉजिस्टिक्स लागत कम हो जाती है।

हालांकि अंतिम कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि ग्राहक सिर्फ सोना खरीद रहा है या डिजाइनर ज्वेलरी भी ले रहा है। अगर कोई सिर्फ निवेश के लिए गोल्ड बार या कॉइन खरीद रहा है, तो रिसाइकल गोल्ड प्रोडक्ट कई बार ज्यादा किफायती साबित हो सकते हैं। क्योंकि सीधे सीधे मेकिंग चार्ज ही 5% से 25% तक कम हो जाता है।

क्यों गोल्ड रीसाइक्लिंग से बचते हैं लोग

स्काय गोल्ड एंड डायमंड के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगेश चौहान का कहना है कि भारत में सोना भावनाओं, परंपरा और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा होता है। इसे अक्सर लंबे समय तक संपत्ति के रूप में रखा जाता है। यह पारिवारिक विरासत की तरह होता है, जिसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपा जाता है।

उन्होंने कहा कि खासकर महिलाएं गोल्ड आपातकालीन सुरक्षा के तौर पर देखती हैं। यही वजह है कि लोग इसे आसानी से बेचने या रीसाइक्लिंग करने से बचते हैं।

क्या रिसाइकल गोल्ड सुरक्षित होता है

अगर गोल्ड BIS हॉलमार्क और प्रमाणित रिफाइनर से आया है, तो रिसाइकल गोल्ड भी उतना ही सुरक्षित माना जाता है जितना नया गोल्ड। दुनिया की कई बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियां अब रिसाइकल गोल्ड का इस्तेमाल कर रही हैं। यूरोप और अमेरिका में सस्टेनेबल गोल्ड इनवेस्टिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। भारत में भी कई बड़ी ज्वेलरी कंपनियां रिसाइकल्ड सोर्सिंग की तरफ बढ़ रही हैं।

हालांकि फिजिकल रिसाइकल गोल्ड खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • BIS Hallmark जरूर चेक करें
  • शुद्धता का सर्टिफिकेट लें
  • भरोसेमंद ज्वेलर या रिफाइनर से खरीदें
  • बायबैक पॉलिसी समझें

आगे क्यों बढ़ सकता है यह ट्रेंड

दुनियाभर में ESG यानी एनवायरमेंट, सोशल और गवर्नेंस आधारित निवेश तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रिसाइकल गोल्ड को पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। नया गोल्ड निकालने के लिए माइनिंग में भारी मात्रा में ऊर्जा, पानी और संसाधनों की जरूरत पड़ती है। वहीं रिसाइकल गोल्ड इस दबाव को कम कर सकता है।

भारत जैसे देश में, जहां घरों में पहले से भारी मात्रा में गोल्ड मौजूद है, वहां आने वाले समय में रिसाइकल गोल्ड इंडस्ट्री तेजी से बढ़ सकती है।

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