घरेलू स्टॉक मार्केट में बिकवाली के माहौल में आज कैपिटल गुड्स स्टॉक्स और भेल (BHEL), एबीबी इंडिया (ABB India), सीजी पावर (CG Power) के शेयर 3-5% तक टूट गए। इनके शेयरों में यह गिरावट पिछले हफ्ते से चली आ रही है जोकि एक रिपोर्ट के चलते आई। इस रिपोर्ट में दावा किया है कि सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में चाइनीज कंपनियों को बोली लगाने की मंजूरी मिल सकती है। हालांकि अभी तक इस मामले में सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी हुआ है। भेल के शेयर फिलहाल 3.8% की गिरावट के साथ ₹264, हिताची एनर्जी इंडिया के शेयर 2.9% की फिसलन के साथ ₹17,363, सीजी पावर के शेयर 1.3% टूटकर ₹587 और एबीबी इंडिया 1.8% की गिरावट के साथ ₹5,000 पर हैं। घरेलू स्टॉक मार्केट में आज अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल के खिलाफ जांच शुरू होने, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों के चलते बिकवाली का माहौल है।
क्या कहना है एक्सपर्ट का?
सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में सोमवार को आईआईएफएल की रेणु वैद्य पुंगलिया ने कहा कि इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत में बदलाव को लेकर संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि ट्रांसमिशन, स्पेस पावर ट्रांसमिशन, हाई वोल्टेज पावर रिएक्टर कैटेगरी में चीन की एक दिग्गज मैन्युफैक्चरर टीबीईए को वित्त वर्ष 2027 से शुरू होने वाले रिएक्टर्स के लिए बोलियों में हिस्सा लेने की मंजूरी मिल गई है। रेणु के मुताबिक ऐसा नहीं है कि प्रतिबंध हटा दिए गए हैं तो ऐसे में फिलहाल यहां आयात का कोई खतरा नहीं है।
ट्रांसमिशन सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि इसमें कंपनियों की क्षमता सीमित है और बाजार में औसत कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं तो वहां ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास जैसी रिपोर्ट्स आई हैं, उसके मुताबिक चीनी कंपनियों को अब आने वाले समय की बोलियों में हिस्सा लेने की अनुमति दी जा रही है। हाई वोल्टेज और एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज स्पेस में हिताची एनर्जी, जीई वर्नोवा टीएंडडी, सीजी पावर, ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स जैसे स्टॉक्स हैं।
चाइनीज कंपनियों की एंट्री का कितना होगा असर?
आईआईएफएल की रेणु वैद्य पुंगलिया को उम्मीद है कि बढ़ते कॉम्पटीशन और मार्केट डिस्काउंटिंग से जुड़े रिस्क को ध्यान में रखते हुए कैपिटल गुड्स स्टॉक्स के वैल्यूएशन में गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि टीबीईए को मंजूरी गई या नहीं, मार्केट प्राइसेज में गिरावट की उम्मीद थी। उनका मानना है कि चाइनीज कंपनियों को भारतीय मार्केट में फिर से एंट्री की मंजूरी मिलती है तो इसका इन कंपनियों पर निगेटिव की बजाय पॉजिटिव ही असर पड़ेगा। उनका मानना है कि इनमें अचानक गिरावट की कोई आशंका नहीं है क्योंकि उत्पादन क्षमता सीमित है।
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