सरकार की तरफ से टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली चीन की कंपनियों को रियायत मिलने की संभावना नहीं है। सरकार के सीनियर अफसरों ने मनीकंट्रोल को इस बारे में बताया। दरअसल, जेडटीई जैसी चीन की टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों ने इंडियन कंपनियों के साथ मिलकर इक्विपमेंट बनाने और उनका एक्सपोर्ट करने का प्रस्ताव दिया था। अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि हाल में जेडटीई ने इंडियन कंपनी के साथ मिलकर टेलीकॉम इक्विपमेंट का इंडिया में उत्पादन करने और कुछ इक्विपमेंट का एक्सपोर्ट करने का प्रस्ताव पेश किया था।
जेडटीई का आंध्र प्रदेश में उत्पादन का प्लान
ZTE टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली चीन की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। 29 जून को उसने हैदराबाद की कंपनी Celkon Resolute के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया था। दोनों कंपनियों का प्लान आंध्र प्रदेश के तिरुपति में बन रहे प्लांट में राउटर्स बनाने का है। एक अधिकारी ने बताया, "कंपनियां इंडिया में प्रोडक्ट्स बना सकती हैं। लेकिन पॉलिसी के मुताबिक, गैर-भरोसेमंद उपकरणों का इस्तेमाल इंडियन नेटवर्क में नहीं किया जा सकता। वे चाहे जो करें सरकार का रुख बदलने वाला नहीं है। उन्हें ट्रस्टेड सोर्सेज रीजीम की तय शर्तों को पूरा करना होगा।"
चीन की कंपनियों को एनसीएससी का एप्रूवल नहीं
चीन की Huawei और ZTE को अभी नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर (NCSC) का एप्रूवल नहीं मिला है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने क्लियरेंस की शर्तें पूरी नहीं की हैं। नियमों के मुताबिक, एप्रूवल के लिए सभी कंपनियों को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से जुड़ी अपनी लोकल सब्सिडियरी, पेरेंट कंपनी, ओनरशिप स्ट्रक्चर और स्पेशिफिकेशन के बारे में बताना जरूरी है। हालांकि, अधिकारी ने यह कहा कि सरकार उन्हें इंडिया में वाई-फाई गियर बनाने से नहीं रोकेगी। उन्होंने कहा, "वे दूसरे वेंडर्स की तरह इसे इंडियन मार्केट में बेच सकती हैं या एक्सपोर्ट कर सकती हैं।"
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अथॉराइज्ड सोर्सेज का जरूरी है क्लियरेंस
नियम के मुताबिक, सर्विस प्रोवाइडर्स के नेटवर्क में इस्तेमाल होने से पहले टेलीकॉम इक्विपमेंट का अथॉराइज्ड सोर्सेज का क्लियरेंस मिलना जरूरी है। हालांकि, वाई-फाई राउटर्स बगैर किसी एप्रूवल के कंज्यूमर्स को सीधे बेचे जा सकते हैं। इससे पहले भारती एयरटेल जैसी कंपनियों ने अपने ग्राहकों को Huawei और ZTE के राउटर्स दिए थे। लेकिन, सरकार की तरफ से सख्ती बढ़ने के बाद उन्होंने GX जैसे ब्रांड्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।