Cipla Q2 Results: दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनी सिप्ला के लिए सितंबर तिमाही अच्छी नहीं रही। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 35 फीसदी घटकर 877.54 करोड़ रुपये रह गया।
Cipla Q2 Results: दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनी सिप्ला के लिए सितंबर तिमाही अच्छी नहीं रही। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 35 फीसदी घटकर 877.54 करोड़ रुपये रह गया।
एक साल पहले की इसी तिमाही में कंपनी ने 1,351 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। नॉर्थ अमेरिका में कमजोर बिक्री और ऑपरेटिंग मुनाफे में तेज गिरावट इसकी बड़ी वजह बनी। नतीजों के बाद मंगलवार दोपहर के कारोबार में सिप्ला का शेयर 0.6 फीसदी गिरकर 1,347 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
मुनाफे के साथ रेवेन्यू भी फिसला
तिमाही में कंपनी के मुनाफे से 473.46 करोड़ रुपये कम हो गए। कमाई के मोर्चे पर भी कंपनी पिछले साल का आंकड़ा नहीं छू पाई। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 2.4 फीसदी घटकर 7,403.93 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 7,589 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू में गिरावट छोटी है, लेकिन मुनाफे पर इसका असर कहीं ज्यादा बड़ा दिखा। इसकी वजह कंपनी के ऑपरेटिंग मुनाफे में आई कमजोरी है।
मार्जिन पर पड़ी सबसे बड़ी चोट
तिमाही में कंपनी का EBITDA 26.8 फीसदी घटकर 1,388 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह 1,895 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन 25 फीसदी से फिसलकर 18.7 फीसदी पर आ गया, यानी 630 बेसिस पॉइंट की सीधी गिरावट। पिछले साल कंपनी हर 100 रुपये की बिक्री पर 25 रुपये का ऑपरेटिंग मुनाफा कमा रही थी, जो अब घटकर 18.7 रुपये रह गया है। रेवेन्यू में मामूली कमी के मुकाबले ऑपरेटिंग मुनाफे में इतनी बड़ी गिरावट ने ही नेट प्रॉफिट को 35 फीसदी नीचे खींच दिया।
भारत के कारोबार ने संभाला मोर्चा
इस मुश्किल तिमाही में भारत का कारोबार कंपनी के लिए सबसे बड़ा सहारा बना। सितंबर तिमाही में भारत से रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़कर 3,516 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल 3,146 करोड़ रुपये था। एक साल में इस कारोबार की कमाई 370 करोड़ रुपये बढ़ी। कंपनी ने बताया कि उसके वन-इंडिया कारोबार ने अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही बिक्री दर्ज की है। बाकी बाजारों में आई सुस्ती के बीच घरेलू बाजार की यह रफ्तार कंपनी के लिए राहत की खबर है।
नॉर्थ अमेरिका से लगा सबसे बड़ा झटका
कंपनी के लिए असली परेशानी नॉर्थ अमेरिका से आई। इस बाजार से रेवेन्यू 19 फीसदी गिरकर 1,643 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले यह 2,039 करोड़ रुपये था। यानी इस एक बाजार में ही कंपनी की कमाई 396 करोड़ रुपये घट गई। डॉलर में देखें तो नॉर्थ अमेरिका कारोबार ने तिमाही में 172 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू कमाया। भारत में बढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा नॉर्थ अमेरिका की इसी गिरावट में बराबर हो गया।
अफ्रीका, उभरते बाजार और यूरोप का हाल
वन अफ्रीका कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 1 फीसदी घटकर 1,171 करोड़ रुपये रहा। इसके अंदर दक्षिण अफ्रीका का रेवेन्यू 3 फीसदी कम होकर 872 करोड़ रुपये पर आ गया। सिप्ला ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में उसका प्राइवेट कारोबार बाजार के मुकाबले 1.3 गुना तेजी से बढ़ा है। उभरते बाजारों और यूरोप से रेवेन्यू 967 करोड़ रुपये पर सपाट रहा। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद इन बाजारों में कमाई टिकी रही।
API कारोबार आधे से भी नीचे
तिमाही में सबसे तेज गिरावट एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स यानी API और दूसरे कारोबारों में दिखी। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 59 फीसदी टूटकर 107 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 259 करोड़ रुपये था। एक साल में इस कारोबार की कमाई 152 करोड़ रुपये घट गई।
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R&D पर खर्च और कैश की स्थिति
कमजोर नतीजों के बीच कंपनी ने रिसर्च पर खर्च में कटौती नहीं की। तिमाही में सिप्ला ने रिसर्च और डेवलपमेंट पर 423 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल बिक्री का 5.7 फीसदी है। यह खर्च मुख्य तौर पर प्रोडक्ट फाइलिंग और अहम डेवलपमेंट प्रोग्राम्स पर किया गया। कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है। सिप्ला के पास 9,823 करोड़ रुपये का नेट कैश है। कंपनी के कर्ज में मुख्य तौर पर लीज देनदारियां और वर्किंग कैपिटल की जरूरतें शामिल हैं।
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