सिटी की सीईओ ने भारत के बारे में बड़ी बात कही है। जेन फ्रेजर ने कहा कि बाजार में हालिया कमजोरी के बावजूद इंडिया का लॉन्ग टर्म इकोनॉमिक आउटलुक स्ट्रॉन्ग बना हुआ है। उन्होंने कहा कि रिफॉर्म्स, डिजिटाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल से इंडिया की ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है।
निवेशकों को लंबी अवधि के फंडामेंटल्स देखने चाहिए
एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई फ्रेजर ने कहा कि इनवेस्टर्स को भारत के लंबी अवधि के फंडामेंटल्स पर फोकस करना चाहिए, न कि छोटी अवधि में होने वाले बाजार के उतार-चढ़ाव पर। सिटी की सीईओ का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार पर काफी दबाव है। रुपये में कमजोरी है और ग्रोथ भी सुस्त पड़ने की आशंका है।
भारत की ग्रोथ की सभावनाओं पर कोई असर नहीं
सिटी की सीईओ ने कहा कि लंबी अवधि में भारत की संभावनाओं पर असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने देखा है कि रिफॉर्म्स, एनर्जी सिक्योरिटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई आधारित डेवलपमेंट को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए शॉर्ट टर्म की चुनौतियों को स्वीकार किया।
भारत जिन चुनौतियों का सामना कर रहा वे वैश्विक हैं
फ्रेजर का मानना है कि आज भारत जिन चुनौतियां का सामना कर रहा है वह किसी एक देश से नहीं जुड़ी हैं बल्कि उनका स्वरूप वैश्विक है। विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स के नियमों को आसान बनाने की सरकार की कोशिश के बारे में उन्होंने कहा कि इससे शॉर्ट टर्म में इनवेस्टमेंट सेंटिमेंट बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दूसरे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार की वैल्यूएशन ज्यादा है और प्राइवेट इनवेस्टमेंट एक्टिविटी कम है। इससे इनवेस्टर्स थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं।
सिटी को भारत में उपलब्ध संभावनाओं पर भरोसा
उन्होंने भारत में बेहतर संभावनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि सिटी ने भी अपनी स्ट्रेटेजी बदली है। कंज्यूमर बैंकिंग ऑपरेशन से एग्जिट करने के बाद सिटी ने कॉर्पोरेट और इंस्टीट्यूशनल बैंकिंग पर फोकस बढ़ाया है। इस स्ट्रेटेजी का फायदा मिला है। सिटी इंडिया की नेट इनकम 35 फीसदी बढ़ी है। रेवेन्यू ग्रोथ 25 फीसदी रही है।
भारतीय बाजार का प्रदर्शन दूसरे बाजारों से खराब
भारतीय बाजारों के खराब प्रदर्शन ने इनवेस्टर्स को निराश किया है। सितंबर 2024 के बाद से भारतीय बाजार ने रिटर्न नहीं दिया है। जब अमेरिका और एशिया के बड़े बाजारों में तेजी दिख रही है तब भारतीय बाजार लगातार दबाव में है। इधर, मध्यपूर्व में टेंशन से क्रूड में उछाल ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया है। विदेशी निवेशक भी भारत में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है।