ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज मैक्स लेटन का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों तक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ना है। वहीं, बैंक का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सोने और चांदी में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों की कीमतों में अभी और कमजोरी आ सकती है।
कच्चे तेल पर क्यों है दबाव?
मैक्स लेटन का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं। अगर ईरान से जुड़ा कोई समझौता होता है, तो बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ चीन से मांग कमजोर बनी हुई है। दूसरे देशों का उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऐसे में बाजार में जरूरत से ज्यादा कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।
Citi का अनुमान है कि अगर मौजूदा बातचीत सफल रही, तो साल के आखिर तक Brent Crude की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। लेटन ने निवेशकों को सलाह दी है कि अगर तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसे मुनाफावसूली का मौका मानना चाहिए।
गोल्ड और सिल्वर पर क्या राय?
मैक्स लेटन का कहना है कि पिछले 18 से 24 महीनों में सोने की तेज रैली की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की मजबूत खरीदारी थी। अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में अगले कुछ हफ्तों तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
उनके मुताबिक, ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से फिलहाल सोने में कमजोरी रह सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि अगले दो महीनों में अगर कीमतें गिरती हैं, तो वही खरीदारी का बेहतर मौका हो सकता है। Citi को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में ब्याज दरों और महंगाई के नरम पड़ने से सोने को फिर सहारा मिल सकता है।
मैक्स लेटन का कहना है कि चांदी भी फिलहाल सोने की दिशा में ही चल सकती है। उनके मुताबिक, हालिया तेजी की बड़ी वजह निवेशकों की खरीदारी थी, न कि औद्योगिक मांग। हालांकि, सोलर जैसे सेक्टरों से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों की वजह से दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे शॉर्ट टर्म में चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।
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