Crude Oil Impact : कच्चे तेल में उछाल से बाजार में हाहाकार, जानिए क्रूड की चाल पर क्या है जेपी मॉर्गन की राय
Crude Oil Impact : क्रूड में 25 फीसदी के उछाल से ऑटो और फर्टिलाइजर शेयरों में तगड़ी बिकवाली आई है। ऑटो शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर,ऊनो मिंडा और संवर्धन मदरसन 5 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं
Middle East crisis : क्रूड की कीमतों में तेजी से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। देश की 80 फीसदी तेल जरूरत इंपोर्ट से पूरी होती है। LPG खपत का 80–85 फीसदी इंपोर्ट पर निर्भर है
Crude Oil Impact : क्रूड में उछाल से बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। निफ्टी करीब 700 प्वाइंट टूटकर 23800 के नीचे आ गया है। निफ्टी 17 अप्रैल 2025 के निचले स्तर पर आ गया है। सेंसेक्स और बैंक निफ्टी भी करीब 2200 प्वाइंट से ज्यादा टूटे हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप भी 3 फीसदी से ज्यादा गिर गए हैं। वहीं वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 21 फीसदी की उछाल के साथ 21 महीने की ऊंचाई पर दिख रहा है।
क्रूड में 25 फीसदी के उछाल से ऑटो और फर्टिलाइजर शेयरों में तगड़ी बिकवाली आई है। ऑटो शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर,ऊनो मिंडा और संवर्धन मदरसन 5 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं। साथ ही मारुति,अशोक लेलैंड,TVS भी तीन से चार फीसदी फिसले हैं। दूसरी ओर फर्टिलाइजर शेयरों में GNFC, दीपक फर्टिलाइजर्स और GSFC 5 फीसदी से ज्यादा फिसले हैं।
ईरान-अमेरिका संग्राम, क्रूड में कोहराम
वेस्ट एशिया में जारी संग्राम के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई बंद होने और UAE और कुवैत के तेल प्रोडक्शन में कमी के चलते कच्चे तेल में आग लगी हुई है। आज ब्रेंट का भाव 120 डॉलर के करीब पहुंच गया। ऑयल का ये झटका बहुत बड़ा है। क्रूड में 25 फीसदी का बड़ा उछाल आया है। यह 2022 के बाद के उच्चतम स्तर है। कच्चे तेल का भाव 3 महीने में दोगुना बढ़ा है। 3 महीनों में कीमतें 91 फीसदी बढ़ीं हैं। कच्चे तेल का भाव 1 हफ्ते में 40 फीसदी, 1 महीने में 60 फीसदी और इस साल अब तक 80 फीसदी भागा है।
तेल का तांडव : तेजी का 34 साल का रिकॉर्ड टूटा
कच्चे तेल में तेजी का 34 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। क्रूड में 1990 के बाद सबसे बड़ा उछाल आया है। 1990 के खाड़ी युद्ध के दौरान 3 महीने में इसमें रिकॉर्ड 141 फीसदी की तेजी आई थी। वहीं, कोविड रिकवरी के दौरान 3 महीने में क्रूड केवल 60 फीसदी बढ़ा था। यह इतिहास का सबसे बड़ा 'ऑयल सप्लाई शॉक'है। हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में 2 करोड़ बैरल प्रति दिन की कमी देखने को मिल रही है। मौजूदा सप्लाई संकट,पिछले 5 बड़े संकटों के बराबर है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार क्रूड का भाव 100 डॉलर के पार गया है। इसमें 1990 के बाद सबसे बड़ी रैली आई है। इस बीच लगातार 10वें दिन भी US-ईरान जंग जारी है। ईरान के Alborz में ऑयल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। हमले से रिफाइनरी के कई डिपो में आग लगी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई अब भी बंद है। UAE, कुवैत और ईराक ने उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है। सप्लाई गिरने से स्टोरेज क्षमता को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
कब -कब हुआ सप्लाई का संकट
हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से 2026 में कच्चे तेल की सप्लाई में 2 करोड़ बैरल प्रति दिन की कमी देखने को मिल रही है। वहीं, ईरानी क्रांति के समय 1978 में प्रति दिन 55 लाख बैरल की कमी दिखी थी। 1973 के अरब-इजरायल जंग के समय प्रति दिन 45 लाख बैरल क्रूड सप्लाई घटी थी। 1990 में इराक-कुवैत युद्ध के दौरान भी तेल की सप्लाई का संकट देखने को मिला था। इस दौरान कच्चे तेल की सप्लाई प्रति दिन 45 लाख बैरल घटी थी। 1980 के ईरान-इराक युद्ध के समय भी कच्चे तेल की सप्लाई में 40 लाख बैरल प्रति दिन का कमी आई थी। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर भी कच्चे तेल की सप्लाई प्रति दिन 20 लाख बैरल घटी थी।
महंगे क्रूड से किन शेयरों को होगा फायदा, कहां होगा नुकसान
महंगे क्रूड से ONGC, OIL India, Reliance, Vedanta और HOEC को फायदा होगा। वहीं, OMCs ((HPCL, BPCL, IOC), पेंट कंपनियों (Asian Paints,Berge Paints), एविएशन (इंडिगो, स्पाइस जेट) और टायर कंपनियों (Balkrishna Ind,Apollo Tyres) को नुकसान होगा।
क्रूड पर जेपी मॉर्गन की राय
जेपी मॉर्गन का कहना है कि खाड़ी देश क्रूड का उत्पादन बंद कर सकते हैं। अगर यह युद्ध 3 हफ्ते से ज्यादा चला तो उत्पादन बंद हो सकता है। खाड़ी देश स्टोरेज भरने के बाद उत्पादन बंद कर सकते हैं। अगले हफ्ते तक क्रूड के उत्पादन में4 MBPD से ज्यादा की कटौती संभव। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा तो और ज्यादा कटौती संभव है।
क्रूड की कीमतों में तेजी से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। देश की 80 फीसदी तेल जरूरत इंपोर्ट से पूरी होती है। LPG खपत का 80–85 फीसदी इंपोर्ट पर निर्भर है। 2025 में करीब 2.5 करोड़ टन LNG इंपोर्ट हुआ था। तेल की कीमत बढ़ने से डॉलर के मुकाबले रुपए में रिकॉर्ड गिरावट जारी है। आगे देश में महंगाई का ग्रॉफ बढ़ता दिख सकता है। क्रूड तमाम सेक्टरों के लिए अहम कच्चा माल है। कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके मार्जिन पर दबाव आ सकता है। महंगाई बढ़ने से आरबीआई द्वारा दरों में कटौती की उम्मीद धुंधली पड़ जाएगी। इससे इकोनॉमी की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।
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