Crude Oil Prices: महंगे क्रूड का भारत की इकोनॉमी पर किस तरह से पड़ेगा असर?

Crude Oil Prices: अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार निकल गया था। अभी यह 90 डॉलर के नीचे आ गया है। लड़ाई शुरू होने से पहले इसका भाव 71 डॉलर प्रति बैरल था

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 12:45 PM
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क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल इसलिए इंडिया के लिए चिंता की वजह है, क्योंकि इंडिया करीब 85 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट करता है।

Crude Oil Prices: क्रूड ऑयल की कीमतें उछलने पर सरकार को इसके आयात पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। भारत क्रूड ऑयल की अपनी 80 फीसदी से ज्यादा जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है। अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार निकल गया था। अभी यह 90 डॉलर के नीचे आ गया है। लड़ाई शुरू होने से पहले इसका भाव 71 डॉलर प्रति बैरल था।

भारत 85 फीसदी क्रूड का आयात करता है

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल इसलिए इंडिया के लिए चिंता की वजह है, क्योंकि इंडिया करीब 85 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट करता है। इसका मतलब है कि क्रूड की कीमतों में घट-बढ़ का असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है। क्रूड की कीमतों में मामूली उछाल से भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाता है।


भारत के आयात बिल में क्रूड की ज्यादा हिस्सेदारी

आयात बिल बढ़ने का सीधा असर सरकार के खजाने पर पड़ता है। भारत जिन चीजों का सबसे ज्यादा आयात करता है, उनमें क्रूड शामिल है। क्रूड में उछाल से भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ जाता है। आयात बिल बढ़ने से करेंट अकाउंट पर दबाव बढ़ता है। इससे रुपया कमजोर होता है। साथ ही महंगे क्रूड से इनफ्लेशन बढ़ता है। चीजों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है। इसका असर कई चीजों की कीमतों पर पड़ता है।

लड़ाई की वजह से मध्यपूर्व से सप्लाई पर असर

इन वजहों से मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है। ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक इलाके के केंद्र में है। इस इलाके में लड़ाई बढ़ने का मतलब है कि क्रूड की सप्लाई में बाधा आएगी। भारत पहुंचने वाला क्रूड का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। मध्यपूर्व की लड़ाई का असर होर्मुज के रास्ते पर पड़ा है। हमले के डर से समुद्री जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

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क्रूड की पर्याप्त सप्लाई के लिए सरकार उठा रही है कदम 

भारत में सरकार क्रूड की सप्लाई में दिक्कत को देखते हुए जरूरी कदम उठा रही है। मध्यपूर्व से सप्लाई में कमी की भरपाई के लिए वह रूस और अमेरिका जैसे दूसरे स्रोतों से क्रूड की खरीद बढ़ा रही है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मध्यपूर्व में लड़ाई जल्द रुक सकती है। अगर ऐसा होता है तो क्रूड की कीमतों में नरमी आएगी। लेकिन, फिलहाल ईरान बातचीत के लिए इच्छुक नहीं दिख रहा। ऐसे में आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है।

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