Crude Oil Prices: बुधवार 17 अप्रैल को तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं। इसका कारण चीन की इकनॉमी बताई जा रही है। बेंचमार्क ब्रेंट 17 अप्रैल को 89.52 डॉलर प्रति बैरल पर खुला, जो पिछले 90.02 डॉलर प्रति बैरल से 0.57 फीसदी कम है। दरअसल, चीन की इकनॉमी उम्मीद से कम प्रदर्शन कर रही है और साथ ही अमेरिका में तेल का प्रोडक्शन बहुत अधिक बढ़ गया है। बावजूद इसके, देशों के बीच झगड़े के कारण मिडिल ईस्ट में बहुत परेशानियां चल रही हैं, लेकिन सिर्फ इसके कारण तेल की कीमतें बढ़ना मुश्किल है।
चीन, तेल का बहुत अधिक इस्तेमाल करता है और उसकी इकनॉमी के बारे में कुछ अच्छी खबरें थी, लेकिन कुल मिलाकर, इसकी इकनॉमी अभी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बेशक चीन की इकनॉमी में मार्च क्वाटर में उम्मीद से ज्यादा ग्रोथ हुई लेकिन कई फैक्टर्स से पता चला कि तेल की डोमेस्टिक डिमांड कम है। आपको बता दें, चीन दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर है।
व्हाइट हाउस के एक सीनियर ऑफिसर का कहना है कि राष्ट्रपति बिडेन गैस की कीमतें कम रखने के लिए उपाय करेंगे, जैसे अमेरिका में गैस का अधिक उत्पादन करना। वहीं उनका ये भी कहना है कि इजराइल, ईरान के हमलों के बारे में क्या करेगा, वे इस रिस्पॉन्स का इंतजार कर रहे हैं, खासकर जबसे अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
वहीं, एक्सपर्ट मानते हैं कि मिडिल ईस्ट में जिओपॉलिटिकल स्ट्रेस तेल की सप्लाई और कीमतों के बढ़ने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि मिडिल ईस्ट में हालात यूं ही खराब होते रहे तो ऑयल के प्राइज 100 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकते हैं। इससे भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि वे 85 फीसदी तक तेल इंपोर्ट करते हैं।